2026 के विधानसभा चुनाव के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तेज है। DMK ने वोटर डिलीशन के आरोपों को लेकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है, जिससे राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बन गया है, जो सीधे तौर पर शासन में स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
चुनावी गड़बड़ी का आरोप
तमिलनाडु की सियासत में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद तनाव गहरा गया है। DMK ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का दावा है कि इस प्रशासनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल Tamizhaga Vettri Kazhagam (TVK) को फायदा पहुँचाने के लिए किया गया।
आंकड़ों की जुबानी
DMK प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने राहुल गांधी को चुनौती दी है कि वे इन चुनावी अनियमितताओं पर अपना रुख स्पष्ट करें। पार्टी द्वारा साझा किए गए आंकड़े चौकाने वाले हैं:
- 135 विधानसभा सीटों पर जहाँ 20,000 से ज्यादा वोटर डिलीट किए गए, वहां TVK ने 84 सीटों पर कब्जा जमाया।
- 10 ऐसी सीटें थीं जहाँ 80,000 से अधिक वोटर्स को हटाया गया और वहां TVK ने क्लीन स्वीप किया।
गठबंधन का अंत और नया समीकरण
चुनाव से पहले जो दल कभी सहयोगी थे, अब वे कट्टर प्रतिद्वंदी बन चुके हैं। कांग्रेस ने DMK का साथ छोड़कर अभिनेता विजय की TVK का समर्थन किया था। अंतिम नतीजों में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि DMK को 59 सीटों से संतोष करना पड़ा।
निवेशकों के लिए संकेत
व्यापारिक दृष्टिकोण से, राज्य में राजनीतिक स्थिरता बहुत महत्वपूर्ण होती है। Election Commission of India की भूमिका पर उठते सवाल और पार्टियों के बीच बढ़ता टकराव नीतिगत फैसलों में देरी का कारण बन सकता है। आने वाले महीनों में नई सरकार की कार्यक्षमता और स्थिरता पर सभी निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की कड़ी नजर रहेगी।
