कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar ने चुनावी साजिश का पर्दाफाश करने का दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल 'Form 7' का गलत इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटवा रहे हैं।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar ने राज्य की मतदाता सूची (Electoral Rolls) की शुचिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़े वर्गों के वोटर्स के नाम सूची से गायब किए जा रहे हैं। इसके लिए 'Form 7' का दुरुपयोग किया जा रहा है, जो असल में वोटर पात्रता पर आपत्ति जताने के लिए एक कानूनी दस्तावेज है।
विरोध और खुलासे
राज्य में चल रही 'Special Intensive Revision' प्रक्रिया के दौरान, सरकार ने अचानक से डिलीशन रिक्वेस्ट्स की बाढ़ देखी। इसके विरोध में शिवकुमार और कांग्रेस नेताओं ने बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के दफ्तर के बाहर 5 घंटे तक धरना दिया। उन्होंने सबूत पेश करते हुए दावा किया कि हजारों की संख्या में फर्जी विवरण के साथ फॉर्म भरे गए हैं, जिसका मकसद चुनिंदा समूहों की वोटिंग ताकत को कमजोर करना है।
चुनाव आयोग का एक्शन
विपक्ष के आरोपों और पेश किए गए सबूतों के बाद, चुनाव अधिकारियों ने सभी आवेदनों की सख्त जांच का वादा किया है। Election Commission of India के नियमों के अनुसार, किसी भी नाम को तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक उसकी पूरी इंक्वायरी न हो जाए। अब प्रशासन इन संदिग्ध रिक्वेस्ट्स का फॉरेंसिक ऑडिट करने की तैयारी कर रहा है ताकि उन लोगों या राजनीतिक समूहों को पकड़ा जा सके, जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को मैनिपुलेट करने की कोशिश की है।
अब सबकी नजरें चुनाव आयोग की आगामी रिपोर्ट पर हैं, जिससे यह साफ होगा कि क्या इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कानूनी या आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी या नहीं।
