DFIA एक्सपोर्टर्स पर सरकारी कार्रवाई: RoDTEP बेनिफिट्स लौटाने के नोटिस जारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
DFIA एक्सपोर्टर्स पर सरकारी कार्रवाई: RoDTEP बेनिफिट्स लौटाने के नोटिस जारी

ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट ऑथोराइजेशन (DFIA) स्कीम का इस्तेमाल करने वाले एक्सपोर्टर्स को सरकारी योजनाओं के तहत मिले RoDTEP बेनिफिट्स वापस करने के नोटिस मिल रहे हैं। इस रिकवरी का असर खासकर MSMEs पर पड़ रहा है, जो इसे अनुचित मान रहे हैं।

DFIA एक्सपोर्टर्स पर रिकवरी का संकट

ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट ऑथोराइजेशन (DFIA) स्कीम का लाभ उठाने वाले निर्यातकों (Exporters) को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी प्राधिकरणों ने इन एक्सपोर्टर्स को रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेस ऑन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्स (RoDTEP) स्कीम के तहत मिले बेनिफिट्स को वापस चुकाने के लिए नोटिस जारी किए हैं। ऑल इंडिया इम्पोर्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (AIIEA) ने इस मुद्दे को उठाया है और कहा है कि ये रिकवरी नोटिस नीतिगत स्पष्टीकरण के बाद भी भेजे जा रहे हैं।

MSME की वित्तीय स्थिरता पर असर

इन रिकवरी नोटिसों ने कई माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज (MSME) निर्यातकों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है। AIIEA के अनुसार, भले ही इन व्यवसायों से फंड वापस मांगा जा रहा है, लेकिन राष्ट्रीय खजाने के लिए इन बेनिफिट्स का वित्तीय पैमाना अपेक्षाकृत छोटा है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो फाइनेंशियल इयर्स में, DFIA एक्सपोर्टर्स द्वारा क्लेम किए गए RoDTEP बेनिफिट्स की कुल राशि लगभग ₹52 करोड़ थी। यह राशि उसी अवधि में व्यापक RoDTEP स्कीम के तहत बांटे गए कुल ₹34,808 करोड़ की तुलना में काफी कम है। हालांकि, छोटे निर्यातकों के लिए इन फंडों को वापस करना उनके सीमित वर्किंग कैपिटल को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है और उनके दिन-प्रतिदिन के ऑपरेशंस को बाधित कर सकता है।

बराबरी के व्यवहार पर बहस

इस विवाद का मुख्य कारण विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रमों (Export Promotion Programs) से निपटने के तरीके में असमानता है। RoDTEP स्कीम को विभिन्न एम्बेडेड टैक्सेस और ड्यूटीज को वापस करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो अन्य तंत्रों के तहत रिबेट नहीं किए जाते हैं। इसका उद्देश्य भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है। AIIEA का तर्क है कि DFIA एक्सपोर्टर्स को भी एडवांस ऑथोराइजेशन, स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZs) और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स (EOUs) के तहत काम करने वालों के समान ही ऐसे खर्चे उठाने पड़ते हैं जिनका रीइम्बर्समेंट नहीं होता। चूंकि ये अन्य श्रेणियां इसी तरह की रिकवरी कार्रवाई का सामना नहीं कर रही हैं, इसलिए उद्योग संघ इस स्थिति को अनुचित मानता है।

रेगुलेटरी और इंडस्ट्री के अगले कदम

उद्योग के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को औपचारिक अभ्यावेदन (Representations) देकर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की है। वे एक ऐसे समाधान की मांग कर रहे हैं जो इन बेनिफिट्स की रिकवरी को रोके, उनका तर्क है कि यह सरकार के निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य के विपरीत है। निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों में निवेशकों और हितधारकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या सरकार आगे कोई स्पष्टीकरण या राहत उपाय प्रदान करती है, क्योंकि यह निर्णय DFIA स्कीम पर भारी निर्भर कंपनियों के भविष्य के कैश फ्लो की स्थिरता को निर्धारित करेगा। प्रभावित MSME निर्यातकों के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए इस मामले का समाधान एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.