ऑनलाइन स्कैमर्स अब बैंक और इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट्स बनाकर लोगों के पर्सनल और फाइनेंशियल डेटा चुरा रहे हैं। अनजान लिंक्स पर क्लिक करने से बचें और वेबसाइट की असलियत ज़रूर जांचें।
Detailed Coverage
भारत में डिजिटल फाइनेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने जहाँ लोगों की ज़िन्दगी आसान बनाई है, वहीं साइबर फ्रॉड का खतरा भी बढ़ा दिया है। इन दिनों धोखेबाज़, बैंक, इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स कंपनियों की हूबहू नकली वेबसाइट्स बना रहे हैं। इन साइट्स का मकसद यूज़र्स से उनके लॉग-इन डिटेल्स, बैंक अकाउंट की जानकारी या पर्सनल डेटा हासिल करना होता है, जिसका इस्तेमाल बाद में फाइनेंशियल फ्रॉड करने में किया जाता है।
पैडलॉक (Padlock) का निशान भी दे सकता है धोखा!
कई लोग सिर्फ इसलिए किसी वेबसाइट पर भरोसा कर लेते हैं क्योंकि उसके एड्रेस बार में एक पैडलॉक का निशान (Icon) दिखता है। लेकिन, यह निशान सिर्फ यह बताता है कि आपका कनेक्शन उस वेबसाइट के साथ एन्क्रिप्टेड (Encrypted) है। यह इस बात की गारंटी नहीं है कि वह वेबसाइट असली और सुरक्षित है। आजकल तो हैकर्स भी अपनी फिशिंग (Phishing) साइट्स को सुरक्षित दिखाने के लिए एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि वे आसानी से यूज़र्स का डेटा चुरा सकें। इसलिए, इस निशान को वेबसाइट की सुरक्षा का पैमाना न मानें।
इन संकेतों पर रखें नज़र
नकली वेबसाइट को पहचानने के लिए कुछ ज़रूरी बातों पर ध्यान देना होगा। सबसे अहम है वेबसाइट का एड्रेस, यानी URL। स्कैमर्स अक्सर 'टाइपोस्क्वैटिंग' (Typosquatting) का सहारा लेते हैं, जिसमें वे असली साइट से मिलती-जुलती URL बनाते हैं, लेकिन उसमें स्पेलिंग की छोटी-मोटी गलतियाँ, अक्षरों की अदला-बदली या अजीब डोमेन एक्सटेंशन (.xyz, .info आदि) का इस्तेमाल करते हैं। URL के अलावा, अगर कोई वेबसाइट आपको डराने-धमकाने या जल्दबाजी करने की कोशिश करे, तो सावधान हो जाएं। जैसे, अगर कोई वेबसाइट कहे कि आपका बैंक अकाउंट तुरंत ब्लॉक हो जाएगा अगर आपने KYC अपडेट नहीं किया, तो यह एक बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) है। इसके अलावा, वेबसाइट में ग्रामर की गलतियाँ, लो-क्वालिटी वाले लोगो, टूटे हुए लिंक्स या ऐसे पेज जो काम नहीं करते, वे भी नकली साइट के संकेत हो सकते हैं।
अपनी गाढ़ी कमाई को कैसे सुरक्षित रखें?
फ्रॉड से बचने के लिए, सुरक्षित ब्राउज़िंग की आदतें अपनाना ज़रूरी है। कभी भी ईमेल, SMS या सोशल मीडिया पर आए लिंक्स से डायरेक्ट किसी फाइनेंशियल पोर्टल पर लॉग-इन न करें। हमेशा अपने ब्राउज़र में वेबसाइट का सही और ऑफिशियल एड्रेस खुद टाइप करें या कंपनी का वेरिफाइड मोबाइल ऐप इस्तेमाल करें। किसी भी नए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या ई-कॉमर्स साइट के साथ डील करने से पहले, कंपनी के बैकग्राउंड की रिसर्च ज़रूर करें और कस्टमर रिव्यूज (Customer Reviews) ज़रूर देखें।
अगर आपको शक है कि आपने किसी धोखाधड़ी वाली साइट पर अपनी डिटेल्स डाल दी हैं, तो तुरंत अपने बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से संपर्क करें। अपने अकाउंट्स को फ्रीज कराएं और पासवर्ड तुरंत बदलें। आप किसी भी तरह के फाइनेंशियल लॉस या संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) पर भी कर सकते हैं।
