दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने हांगकांग से आ रहे यात्रियों से 10 मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन बरामद किए हैं। इनकी कुल कीमत **₹1.03 करोड़** है और इनके पास जरूरी DGCA क्लीयरेंस नहीं थी।
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर हांगकांग से आए यात्रियों के पास से 10 प्रोफेशनल-ग्रेड ड्रोन बरामद किए गए हैं। इन ड्रोन्स के साथ कंट्रोलर और हाई-परफॉरमेंस जॉयस्टिक जैसे एक्सेसरीज भी शामिल थे, जिनकी कुल मार्केट वैल्यू लगभग ₹1.03 करोड़ आंकी गई है।\n\nयह हार्डवेयर मिलिट्री या डिफेंस-ग्रेड तकनीक का है, जिसमें थर्मल इमेजिंग सिस्टम और लेजर रेंज फाइंडर्स जैसे एडवांस्ड सेंसर लगे हैं। भारतीय कानून के तहत, इन्हें 'डुअल-यूज' (Dual-use) तकनीक माना जाता है, क्योंकि इनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इनकी संवेदनशील प्रकृति के कारण, इनके आयात के लिए DGCA (Directorate General of Civil Aviation) से विशेष मंजूरी लेना अनिवार्य है।\n\nफिलहाल, सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (Customs Act, 1962) के प्रावधानों के तहत इन उपकरणों को जब्त कर लिया गया है। इस मामले में तीन यात्रियों को हिरासत में लिया गया है और अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि ये ड्रोन किसे और किस मकसद के लिए सप्लाई किए जा रहे थे।\n\nभारत सरकार देश में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है, लेकिन विदेशी तकनीक के आयात पर सुरक्षा कारणों से सख्त निगरानी जारी है। यह घटना साफ करती है कि ड्रोन सेक्टर में काम कर रही कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना कितना जरूरी है।
