Datia बाय-इलेक्शन के नतीजे आने से कुछ घंटे पहले कांग्रेस पार्टी ने पूर्व MLA Rajendra Bharti को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। भारती, जिन्हें कानूनी सजा के बाद इसी साल अयोग्य घोषित कर दिया गया था, ने इस कदम को साजिश बताया है। 30 जुलाई को हुए इस उपचुनाव में 71.44% वोटिंग हुई थी।
कांग्रेस पार्टी ने रविवार देर शाम मध्य प्रदेश के पूर्व MLA Rajendra Bharti को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करने का ऐलान किया है। यह कार्रवाई Datia बाय-इलेक्शन की वोटों की गिनती शुरू होने से ठीक पहले हुई है, जिसने इस सीट के भविष्य को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ा दी है।
Rajendra Bharti का राजनीतिक सफर
Rajendra Bharti की सियासी स्थिति अप्रैल 2026 से ही अनिश्चित चल रही है, जब उन्हें दिल्ली की एक अदालत द्वारा धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। भारतीय चुनावी कानूनों के अनुसार, दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर विधायकों को तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। इसी के चलते उन्हें विधानसभा से अयोग्य घोषित किया गया था।
भारती का आरोपों पर जवाब
इस निलंबन के बावजूद, भारती ने तेवर कड़े रखे हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले को वरिष्ठ नेताओं द्वारा रची गई साजिश करार दिया है। भारती का आरोप है कि पार्टी के मौजूदा उम्मीदवार Ghanshyam Singh सहित उनके राजनीतिक विरोधियों ने इस स्थिति को पैदा करने में भूमिका निभाई है। भारती ने यह भी साफ कर दिया है कि वह राजनीति में सक्रिय रहेंगे और भविष्य में विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं।
Datia बाय-इलेक्शन: समीकरण और दांव
Datia बाय-इलेक्शन, जो 30 जुलाई को हुआ था, में 71.44% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस मुकाबले में कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें कांग्रेस के Ghanshyam Singh और बीजेपी के Ashutosh Tiwari प्रमुख थे। इस चुनाव के नतीजे पर करीबी नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह उस सीट के उत्तराधिकारी का फैसला करेगा जहां हाल के वर्षों में कड़ा राजनीतिक संघर्ष देखने को मिला है।
2023 के विधानसभा चुनावों में, भारती ने वरिष्ठ नेता Narottam Mishra को 7,700 से अधिक वोटों के अंतर से हराकर इस क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की थी। उनके वर्तमान निलंबन का स्थानीय वोट बैंक पर क्या असर पड़ेगा और Datia क्षेत्र की दीर्घकालिक राजनीतिक गतिशीलता क्या होगी, यह देखना बाकी है। राजनीतिक विश्लेषक अंतिम वोटों की गिनती का इंतजार कर रहे हैं कि क्या कांग्रेस पार्टी के इस फैसले का उसके पारंपरिक वोट आधार पर कोई प्रभाव पड़ता है।
