अयोध्या राम मंदिर में हुए दान की चोरी के मामले में कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। पार्टी ने FIR दर्ज करने में हुई **21 दिन** की देरी पर सवाल उठाए हैं, जबकि जांच में यह खुलासा हुआ है कि चोरी की रकम को कथित तौर पर स्टॉक मार्केट में निवेश किया गया था, जिसके चलते **30 बैंक खातों** को फ्रीज कर दिया गया है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि चोरी की घटना के बाद FIR दर्ज करने में हुई 21 दिन की देरी जानबूझकर की गई ताकि ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों को बचाया जा सके।
SIT की जांच और विवाद
जून 2026 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें ज्यादातर बैंक कर्मचारी और सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं। हालांकि, कांग्रेस ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने के बजाय केवल गवाह के तौर पर रखा गया, जो पक्षपात की ओर इशारा करता है।
स्टॉक मार्केट का कनेक्शन
जांच में एक बड़ा आर्थिक एंगल सामने आया है, जो निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय है। जांचकर्ताओं को पता चला है कि मंदिर के दान से चुराए गए पैसों का एक हिस्सा स्टॉक मार्केट में लगाया गया था और ब्याज पर उधार देने के लिए इस्तेमाल किया गया। इसी कड़ी में प्रशासन ने अब तक 30 बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया है।
अगस्त 2026 में SIT ने अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी थी, लेकिन मामले में राजनीतिक दबाव बरकरार है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश देगा या नहीं।
