Indian National Congress ने अयोध्या के Ram Temple में चंदे के पैसों की चोरी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में जांच की मांग की है। पार्टी ने राज्य सरकार की पिछली जांच पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के दखल पर जोर दिया है।
आरोपों का केंद्र और जांच पर सवाल
विवाद की शुरुआत 4 जून, 2026 को सामने आए एक वीडियो से हुई, जिसमें स्टाफ के सदस्यों को दान की गिनती के दौरान कथित तौर पर कैश के बंडल छिपाते हुए देखा गया था। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक स्पेशल टीम गठित की थी, जिसने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें Champat Rai और Anil Mishra शामिल थे, को क्लीन चिट दे दी थी।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने इस जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि FIR दर्ज करने में 21 दिन की देरी और जांच का तरीका केवल मामले को दबाने का प्रयास लगता है। पार्टी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी रही है।
वित्तीय जवाबदेही पर चिंता
विपक्ष ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष Govind Giri की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं, जो फंड के इनफ्लो और आउटफ्लो के लिए जिम्मेदार हैं। पार्टी का कहना है कि संस्था में सार्वजनिक विश्वास बहाल करने के लिए चंदे के सभी रिकॉर्ड्स को पूरी तरह सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
केंद्रीय एजेंसियों की मांग
कांग्रेस ने अब इस मामले में Enforcement Directorate (ED) और Central Bureau of Investigation (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि आगामी विधानसभा चुनावों के राजनीतिक माहौल में स्थानीय स्तर पर की गई जांच पक्षपाती हो सकती है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या उच्च न्यायिक या केंद्रीय अधिकारी इस मामले में नए सिरे से जांच शुरू करेंगे।
