कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर डेलिमिटेशन बिल पर सर्वदलीय बैठक की मांग की है। संसद सत्र के सत्रावसान (Prorogation) में **64 दिनों** की देरी से राजनीतिक और बाजार में अनिश्चितता का माहौल है, जिसे निवेशक बारीकी से ट्रैक कर रहे हैं।
संसद सत्र में देरी और चिंताएं
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त, 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन 64 दिन बीत जाने के बाद भी आधिकारिक तौर पर सत्रावसान (Prorogation) नहीं किया गया है। यह संसदीय परंपरा से एक बड़ा बदलाव है। विपक्ष को डर है कि सरकार अचानक सत्र बुलाकर डेलिमिटेशन बिल जैसा बड़ा बदलाव लाना चाहती है।
क्या है डेलिमिटेशन बिल का विवाद?
यह बिल देश भर में चुनावी क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण (Redrawing boundaries) से जुड़ा है। चूँकि इसमें संविधान संशोधन की जरूरत है, इसलिए इसे पास कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई (2/3) बहुमत अनिवार्य है। सरकार अप्रैल 2026 में इसे पारित कराने में विफल रही थी।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
बाजार हमेशा स्थिरता चाहता है। इस तरह की प्रक्रियात्मक अनिश्चितता निवेशकों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि अचानक लाए गए बड़े विधायी बदलाव बिजनेस एनवायरनमेंट और पॉलिसी स्टेबिलिटी पर असर डाल सकते हैं। फिलहाल मार्केट की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार इस सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करती है या फिर संसद का सत्र फिर से बुलाने की तैयारी है।
