कांग्रेस ने गृह मंत्री Amit Shah से उन कथित घुसपैठियों का डेटा मांगा है जिन्हें मतदाता सूची से हटाया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में करीब **14 करोड़** वोटर्स को बाहर कर दिया गया है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
चुनावी सूची पर विवाद और कांग्रेस की चुनौती
Indian National Congress के नेता Jairam Ramesh ने गृह मंत्री Amit Shah को औपचारिक चुनौती देते हुए मतदाता सूची से हटाए गए संदिग्ध घुसपैठियों का पूरा डेटा सार्वजनिक करने की मांग की है। यह विवाद देशभर में चली 'Special Intensive Revision' (SIR) प्रक्रिया के बाद शुरू हुआ है, जिसने सरकार और विपक्ष के बीच बड़ी तनातनी पैदा कर दी है।
क्या है 14 करोड़ वोटर्स का विवाद?
विपक्ष का दावा है कि इस पूरी कवायद में करीब 14 करोड़ वैध वोटर्स को सूची से हटा दिया गया है। Jairam Ramesh का आरोप है कि सरकार घुसपैठियों के नाम पर आम नागरिकों को वोटिंग प्रक्रिया से दूर कर रही है। कांग्रेस ने अब उन 100 करोड़ लोगों का ऑडिट करने की मांग की है, जो इस रिवीजन प्रक्रिया का हिस्सा थे, ताकि बाहर किए गए लोगों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
सरकार का कड़ा रुख
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने विपक्ष के दावों को एक 'राजनीतिक चाल' करार दिया है। Shah के मुताबिक, सरकार का मकसद केवल चुनावी सिस्टम की शुद्धता बनाए रखना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विपक्ष अवैध निवासियों को वोटर के तौर पर रजिस्टर कराना चाहता है। साथ ही, उन्होंने यह भविष्यवाणी भी की कि 2029 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को चौथी बार हार का सामना करना पड़ेगा।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
बाजार के नजरिए से राजनीतिक स्थिरता और Election Commission of India जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता बेहद अहम है। हालांकि यह पूरी तरह से राजनीतिक मुद्दा है, लेकिन संस्थानों को लेकर उठते सवाल और संसदीय गतिरोध अक्सर मार्केट में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। यदि संसद में कामकाज बार-बार रुकता है, तो बड़े आर्थिक सुधारों (Economic Reforms) पर असर पड़ सकता है, जो सीधे तौर पर निवेशकों की सेंटीमेंट को प्रभावित करता है। अब बाजार की नजरें Election Commission के जवाब और आगे के विधायी घटनाक्रमों पर टिकी हैं।
