Congress Working Committee (CWC) की बैठक में गठबंधन की रणनीति और Nitish Kumar के इंडिया ब्लॉक छोड़ने पर जमकर बहस हुई। इसके साथ ही पार्टी ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए Election Commission के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
गठबंधन की रणनीति पर दो फाड़
हालिया CWC बैठक में कांग्रेस के भीतर गठबंधन प्रबंधन को लेकर गहरे मतभेद सामने आए हैं। चर्चा का मुख्य केंद्र बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar का इंडिया (INDIA) ब्लॉक से बाहर निकलना था। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बेहतर प्रबंधन किया जाता, तो उन्हें रोका जा सकता था। हालांकि, सोनिया गांधी ने इसे पहले से तय कदम बताया और कहा कि Nitish Kumar का Bharatiya Janata Party (BJP) के साथ जाना एक अपरिहार्य स्थिति थी।
चुनाव आयोग से सीधी टक्कर
आंतरिक मुद्दों के अलावा, पार्टी ने अब Election Commission ऑफ इंडिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' के दौरान 13 करोड़ से ज्यादा नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं। इसे आधार बनाकर पार्टी ने कानूनी और संवैधानिक रास्ता अपनाने का ऐलान किया है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है और संसद के साथ-साथ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। मार्केट और निवेशकों के नजरिए से संवैधानिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों के बीच यह टकराव नीतिगत अनिश्चितता (Policy Uncertainty) का कारण बन सकता है। बाजार पर नजर रखने वालों के लिए यह जरूरी है कि वे देखें कि आगे कानूनी कदम क्या उठाए जाते हैं, क्योंकि यही भविष्य में संस्थागत स्थिरता और शासन के मानदंडों को तय करेगा।
