केंद्र सरकार Cochin Shipyard में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। ऑफर फॉर सेल (OFS) 7 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें शेयर का फ्लोर प्राइस ₹1,400 तय किया गया है, जो कि मौजूदा बाजार भाव से कम है। यह कदम SEBI के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों को पूरा करने के लिए उठाया जा रहा है।
सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री
भारत सरकार Cochin Shipyard Ltd में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लेकर आ रही है। यह बिक्री 7 जुलाई 2026 से शुरू होगी। इस सौदे के तहत, सरकार कंपनी की 2.52% इक्विटी बेचेगी। अगर निवेशकों की मांग ज्यादा रहती है, तो सरकार अतिरिक्त 2.52% हिस्सेदारी भी बेच सकती है। सरकार ने इस OFS के लिए शेयर का फ्लोर प्राइस ₹1,400 प्रति शेयर तय किया है।
बिक्री का शेड्यूल और कीमत
यह OFS अलग-अलग निवेशकों के लिए अलग-अलग दिनों में खुलेगा। नॉन-रिटेल निवेशक 7 जुलाई 2026 को बोली लगा पाएंगे, जबकि रिटेल निवेशकों के लिए बोली लगाने का दिन 8 जुलाई 2026 होगा। ₹1,400 का फ्लोर प्राइस 6 जुलाई 2026 को BSE पर स्टॉक के क्लोजिंग प्राइस ₹1,504.75 से कम है।
नियमों का पालन और विनिवेश रणनीति
यह बिक्री SEBI के उन नियमों को पूरा करने के लिए जरूरी है, जिनके तहत लिस्टेड पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) को कम से कम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखनी होती है। हाल के शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार, सरकार की हिस्सेदारी इस सीमा से अधिक थी, इसलिए हिस्सेदारी कम करना आवश्यक हो गया था। रेगुलेटरी कंप्लायंस के अलावा, यह कदम केंद्र सरकार की पब्लिक सेक्टर की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम करके फंड जुटाने की रणनीति का हिस्सा है। मई 2026 से अब तक, सरकार इसी तरह के OFS के जरिए विभिन्न सरकारी कंपनियों से ₹16,000 करोड़ से अधिक जुटा चुकी है।
सेक्टर और बाजार का माहौल
Cochin Shipyard जहाज निर्माण और मरम्मत के क्षेत्र में काम करती है, और सरकार समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐतिहासिक रूप से, अन्य सरकारी कंपनियों में हालिया सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री में निवेशकों की अच्छी भागीदारी देखी गई है। अक्सर मजबूत ऑर्डर बुक और लगातार डिविडेंड (Dividend) देने वाली कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी के कारण ग्रीन-शूट ऑप्शन का पूरा उपयोग हो जाता है। हालांकि, निवेशक अक्सर अल्पावधि में इस तरह की बड़ी मात्रा में शेयर की आपूर्ति के स्टॉक प्राइस पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रखते हैं, क्योंकि तरलता (Liquidity) में अचानक वृद्धि से कभी-कभी अस्थिरता आ सकती है।
निवेशकों के लिए, इस OFS के बाद मुख्य ध्यान संस्थागत (Institutional) और रिटेल दोनों श्रेणियों में अंतिम सब्सक्रिप्शन लेवल और शेयरों के निपटान पर रहेगा। कंपनी की लाभ मार्जिन बनाए रखने और अपने मौजूदा ऑर्डर बुक को पूरा करने की क्षमता इस एकमुश्त लिक्विडिटी इवेंट से परे मुख्य व्यावसायिक फोकस बनी रहेगी।
