Flipkart की मालिकाना हक वाली कंपनी Cleartrip ने साल 2027 तक ऑपरेशनल ब्रेक-ईवन तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। कंपनी एयर टिकटिंग के बजाय अब होटल और ट्रांसपोर्ट जैसी हाई-मार्जिन कैटेगरी पर ध्यान केंद्रित कर रही है, साथ ही AI का भी सहारा ले रही है।
Flipkart के स्वामित्व वाली ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म Cleartrip अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी अब 'डीप डिस्काउंटिंग' के दौर से बाहर निकलकर मुनाफे की ओर बढ़ने की कोशिश में है। अब उनका फोकस एयर टिकटिंग, जहां मार्जिन कम होता है, से हटकर होटल्स, होमस्टे और ग्राउंड ट्रांसपोर्ट जैसी कैटेगरी पर शिफ्ट हो रहा है।
नॉन-एयर रेवेन्यू बढ़ाने की तैयारी
कंपनी एयर ट्रैवल मार्केट पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है। साल 2026 के मध्य तक, कंपनी के कुल रेवेन्यू में नॉन-एयर बुकिंग्स की हिस्सेदारी 20-22% रही है, जिसे 2027 के अंत तक 45% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कंपनी ने सीधे होटल्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट किए हैं, जिससे अब उनके पास 6 लाख से अधिक घरेलू प्रॉपर्टीज का इन्वेंट्री डेटा है।
फाइनेंशियल स्थिति और AI का रोल
वित्तीय वर्ष 2025 में कंपनी ने ₹651 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया था, जबकि रेवेन्यू ₹234.7 करोड़ रहा। इस भारी नुकसान को कम करने के लिए Cleartrip अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही है। AI के जरिए कंपनी ट्रैवल प्लानिंग को आसान बना रही है और ऑपरेशंस को ऑप्टिमाइज कर रही है, ताकि कस्टमर रिटेंशन बेहतर हो और अधिग्रहण की लागत (acquisition cost) कम की जा सके।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां
भारतीय ट्रैवल मार्केट में Cleartrip की टक्कर MakeMyTrip जैसे दिग्गजों से है, जो पहले से ही मार्केट लीडर हैं। इसके अलावा IRCTC का ट्रेन टिकटिंग पर दबदबा है। कंपनी के सामने मुख्य चुनौती यह है कि उसे Flipkart की फंडिंग के बिना अपना बिजनेस मॉडल सस्टेनेबल बनाना होगा। 2027 तक ब्रेक-ईवन तक पहुंचना आसान नहीं होगा, क्योंकि ट्रैवल डिमांड और ऑपरेशनल चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
