Flipkart के स्वामित्व वाली Cleartrip अब डिस्काउंट-आधारित मॉडल से दूरी बना रही है। कंपनी का लक्ष्य **2027** तक ऑपरेशनल ब्रेक-ईवन हासिल करना है, जिसके लिए वह होटल, बस और ट्रेन बुकिंग पर फोकस बढ़ा रही है।
मुनाफे की ओर बड़ा कदम
Cleartrip ने अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव किया है। वर्तमान में कंपनी की कुल इनकम का 80% हिस्सा केवल फ्लाइट टिकटों से आता है। अब कंपनी इस निर्भरता को कम कर होटल, बस और ट्रेन बुकिंग के योगदान को फाइनेंशियल ईयर 2027 तक 30% से 35% के स्तर पर ले जाने की योजना बना रही है।
डिस्काउंट के दौर से आगे की सोच
अब कंपनी पुराने ढर्रे यानी सिर्फ भारी डिस्काउंट देकर कस्टमर जोड़ने के बजाय लॉयल्टी प्रोग्राम्स पर जोर दे रही है। कंपनी के 'Elite' प्रोग्राम और होटलों के साथ सीधी पार्टनरशिप से उसे उम्मीद है कि ग्राहकों का जुड़ाव लंबे समय तक बना रहेगा। होटल सेगमेंट में पहले ही रूम नाइट वॉल्यूम और इंटरनेशनल प्रॉपर्टी इन्वेंट्री में सुधार देखा गया है।
वित्तीय चुनौतियां और मार्केट कॉम्पिटिशन
हालांकि, राह आसान नहीं है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी को ₹651 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि नेट ऑपरेटिंग रेवेन्यू सिर्फ ₹169 करोड़ रहा। मार्केट में MakeMyTrip और Ixigo जैसे दिग्गजों से मिल रही कड़ी टक्कर और ग्राहकों को लुभाने के लिए होने वाला भारी खर्च (Cash Burn) कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
निवेशकों की नजर कहां है?
Cleartrip भले ही शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, लेकिन इसकी परफॉर्मेंस भारतीय ट्रैवल-टेक सेक्टर का हाल बयां करती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या 2027 तक कंपनी का यह नया मॉडल उसे मुनाफे की दहलीज तक पहुंचा पाएगा या नहीं, क्योंकि कंज्यूमर स्पेंडिंग और फ्यूल प्राइस जैसे मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर इस सेक्टर पर गहरा असर डालते हैं।
