Choice International ने नए वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ₹191.38 करोड़ के 23 सरकारी प्रोजेक्ट्स हासिल किए हैं। इन ऑर्डर्स में ई-गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और विभिन्न राज्यों में सलाहकार सेवाएं शामिल हैं।
Detailed Coverage
मुंबई स्थित वित्तीय सेवा और कंसल्टिंग फर्म Choice International Ltd ने ऐलान किया है कि उसकी सहायक कंपनियों ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के लिए करीब ₹191.38 करोड़ के 23 सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स जीते हैं। ये प्रोजेक्ट्स कंपनी की कंसल्टेंसी आर्म्स, Choice Consultancy Services Private Ltd और Ayoleeza Consultants Private Ltd को मिले हैं और ये आठ राज्यों व एक यूनियन टेरिटरी में फैले हुए हैं।
बिहार में बड़े प्रोजेक्ट्स
इनमें सबसे बड़ा योगदान बिहार से आया है। कंपनी को स्थानीय सरकारी निकायों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म को लागू करने और उसे मेंटेन करने का काम सौंपा गया है, जिसकी अवधि 60 महीने है। इसके अलावा, कंपनी 12 महीने की अवधि के लिए राज्य के अर्बन चैलेंज फंड के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (DPRs) भी तैयार करेगी। ये लंबे समय के प्रोजेक्ट्स रेवेन्यू की विजिबिलिटी तो देते हैं, लेकिन इनके अंतिम प्रॉफिट मार्जिन पर कंपनी की ऑपरेशनल कॉस्ट्स को मैनेज करने की क्षमता का असर दिखेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सेवाएं
ई-गवर्नेंस के अलावा, Choice International अपनी सर्विस पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है। इसने बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के तहत गार्गाई डैम वाटर कन्वेयंस प्रोजेक्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कामों के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी की भूमिकाएं हासिल की हैं, साथ ही तमिलनाडु में रेलवे निर्माण की सुपरविजन भी करेगी। बाकी 19 कॉन्ट्रैक्ट्स छोटे पैमाने के हैं, जिनमें से प्रत्येक का मूल्य ₹5 करोड़ तक है। ये रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन, रिन्यूएबल एनर्जी एडवाइजरी और फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के ऑडिट जैसे विभिन्न सेक्टर्स को कवर करते हैं।
वैल्यूएशन और निवेशकों की नजर
फाइनेंशियल एंगल से देखें तो कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन फिलहाल करीब ₹18,145 करोड़ है। स्टॉक का पीई (प्राइस-टू-अर्निंग) रेशियो 76.33 है। हालांकि पिछले तीन सालों में शेयर की कीमतों में अच्छी तेजी आई है, लेकिन यह हाई पीई रेशियो बताता है कि मार्केट भविष्य में कंपनी की कमाई में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है। कंसल्टेंसी और सर्विसेज सेक्टर में ऐसी वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए निवेशक लगातार ऑर्डर एग्जीक्यूशन पर नजर रखते हैं।
आगे क्या देखना होगा?
चूंकि कंपनी सरकारी प्रोजेक्ट्स की एक विस्तृत श्रृंखला में शामिल है, इसलिए सफलता समय पर एग्जीक्यूशन और लागत में वृद्धि से बचने पर निर्भर करेगी, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और कंसल्टिंग टेंडर्स में आम जोखिम हैं। सरकारी भुगतानों में कोई भी देरी या प्रोजेक्ट के दायरे में बदलाव कैश फ्लो को भी प्रभावित कर सकता है। शेयरधारकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि कंपनी अपने कंसल्टेंसी बिजनेस को प्रभावी ढंग से कैसे स्केल करती है और पिछले समय के प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रखती है। इन स्पेसिफिक प्रोजेक्ट्स के कमीशनिंग और तिमाही नतीजों पर पड़ने वाले असर से जुड़ी भविष्य की अपडेट्स निवेशकों के लिए ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा।
