इंडस्ट्री 4.0 के लिए बदले सिलेबस
इंडस्ट्री में ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बोलबाला बढ़ रहा है। इसे देखते हुए Chitkara University ने अपने मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्सेज में जरूरी डिजिटल स्किल्स को शामिल किया है। अब नॉन-सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स भी कंप्यूटर साइंस में माइनर कर सकेंगे। यूनिवर्सिटी का मानना है कि इससे फ्रेश ग्रेजुएट्स में मल्टी-डिसिप्लिनरी टेक्निकल स्किल्स की कमी को दूर किया जा सकेगा और वे इंडस्ट्री की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।
EV और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास फोकस
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EMobility) की तरफ बढ़ते ऑटोमोटिव सेक्टर में नई स्किल्स की जरूरत है। Automotive Research Association of India (ARAI) के साथ पार्टनरशिप से स्टूडेंट्स को इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड व्हीकल्स के बारे में खास जानकारी मिलेगी। यह सुनिश्चित करेगा कि पढ़ाई इंडस्ट्री की मौजूदा रेगुलेटरी और टेक्निकल फ्रेमवर्क के मुताबिक हो। वहीं, L&T EduTech की मदद से सिविल इंजीनियरिंग में AI और मशीन लर्निंग को शामिल किया जा रहा है, जो स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट और ऑटोमेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडलिंग के लिए महत्वपूर्ण है।
इंडस्ट्री पर निर्भरता का खतरा
कॉर्पोरेट पार्टनर्स के साथ जुड़ने से स्टूडेंट्स को जॉब रेडीनेस तो मिलेगी, लेकिन वे उन पार्टनर्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली खास टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो सकते हैं। कॉर्पोरेट का प्रभाव कभी-कभी इंडस्ट्री के ब्रॉड इंजीनियरिंग प्रिंसिपल्स पर भारी पड़ सकता है। इससे ग्रेजुएट्स किसी खास कंपनी के तरीकों में ओवर-स्पेशलाइज्ड हो सकते हैं, जो भविष्य में इंडस्ट्री के स्टैंडर्ड्स बदलने पर दिक्कतें पैदा कर सकता है। साथ ही, हाई-कॉस्ट लैब्स को मेंटेन रखना और टेक्नोलॉजी के तेजी से बदलते दौर में अपडेटेड रहना यूनिवर्सिटी के लिए एक बड़ी चुनौती है।
आगे की राह
प्राइवेट यूनिवर्सिटीज अपने स्टूडेंट्स को जॉब के लिए तैयार करने के लिए ऐसे इंडस्ट्री-फोक्स्ड मॉडल अपना रही हैं। Chitkara University भी अपने प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग और रिसर्च ग्रांट्स के जरिए अपनी पोजीशन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। यूनिवर्सिटी की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन हाई-लेवल पार्टनरशिप्स को बनाए रख पाती है या नहीं और ग्लोबल इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी के साथ कदम मिला पाती है या नहीं। क्रॉस-फंक्शनल स्किल्स पर जोर देना यह दर्शाता है कि यूनिवर्सिटी लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहना चाहती है, जहाँ बेसिक इंजीनियरिंग से ज्यादा इंटीग्रेटेड सिस्टम मास्टरी को महत्व दिया जा रहा है।
