चीन में रिलेशनशिप कोचिंग इंडस्ट्री ज़ोरों पर है। लोग सुलह (Reconciliation) के लिए भारी रकम खर्च कर रहे हैं, लेकिन बिना किसी रेगुलेशन के चलते ग्राहकों की शिकायतें बढ़ रही हैं और सर्विस की असलियत पर भी सवाल उठ रहे हैं।
Detailed Coverage
चीन में एक नई इंडस्ट्री तेज़ी से फल-फूल रही है, जहां लोग प्रोफेशनल रिलेशनशिप कोचिंग के लिए मोटी रकम, कभी-कभी 3 लाख युआन तक खर्च कर रहे हैं। ये सर्विसेज़ क्लाइंट्स को उनके पुराने पार्टनर से सुलह कराने का वादा करती हैं। शादी और रिश्तों को लेकर बढ़ते सामाजिक दबाव के बीच यह एक बड़ा बाज़ार बन गया है। चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इन सर्विसेज़ को ज़्यादा पहचान दिलाई है, और इनसे जुड़े कंटेंट को अरबों बार देखा गया है।
महंगे प्लान्स और अनिश्चित नतीजे
इस बिजनेस मॉडल में अक्सर कई चरणों वाले कोचिंग पैकेज शामिल होते हैं। क्लाइंट्स को पर्सनल प्लान्स के लिए भुगतान करना पड़ता है, जिसमें कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी, लुक्स (Appearance) को बेहतर बनाने की सलाह और सोशल मीडिया मैनेजमेंट जैसी चीज़ें शामिल होती हैं। कुछ प्रोग्राम्स में 24x7 सपोर्ट का भी दावा किया जाता है, और कोच अक्सर 90% तक की सफलता दर का दावा करते हैं।
लेकिन, कई क्लाइंट्स को निराशा हाथ लगी है। कई मामलों में, प्रोफेशनल गाइडेंस के बाद भी सुलह नहीं हुई, और कुछ तो ऐसे भी थे जहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत पूरी तरह बंद हो गई। जब शुरुआती प्लान फेल हो जाते हैं, तो क्लाइंट्स को अक्सर और भी महंगे, 'प्रीमियम' कोचिंग सेशन खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह ग्राहकों के लिए चिंता का विषय है कि क्या यह बिज़नेस प्रैक्टिस नैतिक है।
रेगुलेटरी और बाज़ार की चुनौतियां
इस सेक्टर का तेज़ी से विस्तार इस बात से झलकता है कि चीन में रजिस्टर्ड साइकोलॉजिकल काउंसलिंग कंपनियों की संख्या 2016 में लगभग 18,000 से बढ़कर 2026 तक 1,60,000 से ज़्यादा हो गई है। इस भारी बढ़ोतरी के बावजूद, यह इंडस्ट्री ज़्यादातर अनरेगुलेटेड (Unregulated) है। कंज्यूमर राइट्स प्लेटफॉर्म्स पर असफल कोचिंग सर्विसेज़ को लेकर 3,000 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह फर्मों द्वारा किए गए वादों और ग्राहकों को मिलने वाली असल वैल्यू के बीच एक बड़ा गैप दिखाता है।
अकादमिक एक्सपर्ट्स और कंज्यूमर एक्टिविस्ट्स ने चिंता जताई है कि ये फर्में अक्सर ऐसे लोगों को टारगेट करती हैं जो भावनात्मक रूप से सबसे ज़्यादा कमजोर होते हैं। चूंकि इन 'रिलेशनशिप कोच' के लिए कोई स्टैंडर्ड क्वालिफिकेशन या निगरानी तंत्र नहीं है, इसलिए शोषण का खतरा ज़्यादा है। इन्वेस्टर्स और एनालिस्ट्स का मानना है कि ज़्यादा स्पष्ट सरकारी गाइडलाइंस या इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स के बिना, इस सेक्टर को अपनी रेपुटेशन (Reputation) का नुकसान झेलना पड़ सकता है और भविष्य में रेगुलेटरी एक्शन भी लिया जा सकता है। इस बाज़ार का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानून लागू करती है या नहीं, या फिर निगेटिव पब्लिसिटी (Publicity) के चलते इनकी मांग कम होती है।
