चीन में माता-पिता अपने बच्चों के कैरेक्टर बनाने के लिए ग्रामीण इलाकों में 'हार्डशिप समर कैंप' में हजारों युआन खर्च कर रहे हैं। यह ट्रेंड चीन के एजुकेशन सेक्टर में कंज्यूमर स्पेंडिंग में बड़े बदलाव को दिखाता है। फैमिलीज़ अब पारंपरिक ट्यूशन से हटकर प्रैक्टिकल लर्निंग की ओर बढ़ रही हैं। हालांकि, इन प्राइवेट और अनरेगुलेटेड प्रोग्राम्स के अपने खतरे भी हैं।
बच्चों की 'कठिनाई' में पेरेंट्स का निवेश
चीन में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहाँ माता-पिता अपने बच्चों को 'कैरेक्टर बिल्डिंग' सिखाने के लिए ग्रामीण इलाकों में 'हार्डशिप समर कैंप' में भेज रहे हैं। इन कैंपों के लिए पेरेंट्स 4,000 से 10,000 युआन (लगभग ₹56,000 से ₹1.4 लाख) तक खर्च कर रहे हैं। ये कैंप मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिमी प्रांतों जैसे सिचुआन और युन्नान में चल रहे हैं। यहाँ बच्चों को आलू खोदने, छाल छीलने और पशुओं को चारा खिलाने जैसे शारीरिक श्रम वाले काम करने होते हैं। कैंपों में मोबाइल फोन की मनाही है और काम के आधार पर भोजन दिया जाता है। इसका मकसद बच्चों को पैसे की अहमियत और पिछली पीढ़ियों के संघर्षों को सिखाना है।
एजुकेशन सेक्टर में बड़ा बदलाव
यह ट्रेंड निवेशकों और मार्केट एनालिस्ट्स के लिए चीन के एजुकेशन और चाइल्ड-केयर मार्केट में एक बड़े इवोल्यूशन को दर्शाता है। 2021 की सरकार की 'डबल रिडक्शन' पॉलिसी के बाद, जिसने प्राइवेट ट्यूशन और एकेडमिक कोचिंग को बैन कर दिया था, इस इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आया है। कई एजुकेशन प्रोवाइडर्स और प्राइवेट फर्म्स को पारंपरिक सब्जेक्ट-बेस्ड ट्यूशन से हटकर स्पोर्ट्स, एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज और 'कैरेक्टर-बिल्डिंग' एक्सपीरियंसेज की ओर मुड़ना पड़ा है। ये हार्डशिप कैंप इसी बदलाव का हिस्सा लगते हैं, क्योंकि पेरेंट्स स्टैंडर्ड करिकुलम के बाहर अपने बच्चों को कंपटीटिव एज देना चाहते हैं।
रेगुलेटरी और सेफ्टी रिस्क
हालांकि, इन प्राइवेट और लोकल ऑपरेटर्स का तेजी से बढ़ना कई जोखिम भी पैदा करता है। चूंकि ये कैंप अक्सर फॉर्मल एजुकेशन सिस्टम के बाहर काम करते हैं, इसलिए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स, चाइल्ड प्रोटेक्शन और ऑपरेशनल ट्रांसपेरेंसी को लेकर इनकी निगरानी सीमित है। सोशल मीडिया पर इन कैंपों में परेशान बच्चों के वीडियो वायरल होने से पब्लिक का रिएक्शन बढ़ सकता है। अगर ऐसी घटनाओं में बच्चों को शारीरिक चोटें आती हैं या मेंटल हेल्थ से जुड़ी चिंताएं बढ़ती हैं, तो सरकार इस इंडस्ट्री को कंट्रोल करने के लिए सख्त नियम ला सकती है, जैसा कि उसने कंज्यूमर सर्विसेज के दूसरे सेक्टर्स में किया है।
भविष्य पर सवाल?
इस ट्रेंड की सस्टेनेबिलिटी पर भी सवाल बना हुआ है। हालाँकि वर्तमान मांग उन पेरेंट्स से आ रही है जो 'ग्रिट' और ट्रेडिशनल वैल्यूज को महत्व देते हैं, लेकिन कम समय के लिए हाई-इंटेंसिटी लेबर को एक पेडागोजिकल टूल के तौर पर इसकी प्रभावशीलता पर बहस जारी है। निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि क्या यह निश मार्केट, चीन के ब्रॉडर एक्सपीरियंस-बेस्ड एजुकेशन मार्केट का एक रेगुलेटेड सब-सेक्टर बनता है या फिर सेफ्टी और वेलफेयर चिंताओं के कारण इसे क्रैकडाउन का सामना करना पड़ता है। इस मार्केट का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि ऑपरेटर्स 'हार्डशिप' एक्सपीरियंसेज की मांग को जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ कैसे संतुलित करते हैं, या फिर रेगुलेटरी बॉडीज इसमें हस्तक्षेप करती हैं।
