छत्तीसगढ़ में भारी मानसूनी बारिश के चलते नेशनल हाईवे-30 का कुछ हिस्सा जलमग्न हो गया है, जिससे रायपुर और जगदलपुर के बीच लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन में बड़ी रुकावटें आ रही हैं। प्रमुख बांधों में पानी का स्तर खतरे के निशान तक पहुंच चुका है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
लॉजिस्टिक्स पर गहरा असर
छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश ने इंफ्रास्ट्रक्चर की कमर तोड़ दी है। रायपुर और जगदलपुर को जोड़ने वाली लाइफलाइन मानी जाने वाली NH-30 आंशिक रूप से डूब गई है, जिसके चलते भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। ट्रैफिक डायवर्जन के कारण अब उद्योगों को कच्चे माल और फिनिश्ड गुड्स की डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
बांधों का बढ़ा दबाव
राज्य के प्रमुख जलाशयों पर भी भारी दबाव बना हुआ है। 25 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, गंगरेल बांध 98.14% और मुरूमसिल्ली बांध 100% भर चुका है। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने महानदी और रुद्री नहर सिस्टम में 54,000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा है। इस जल निकासी के कारण निचले इलाकों में सेकेंडरी फ्लड का जोखिम काफी बढ़ गया है।
उद्योगों के लिए चुनौतियां
दुर्ग और दंतेवाड़ा समेत 9 जिलों में हालात इतने गंभीर हैं कि प्रशासन को स्कूल और परीक्षाएं तक रद्द करनी पड़ी हैं। छत्तीसगढ़ में माइनिंग, पावर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के कई बड़े प्लांट स्थित हैं। फिलहाल इन कंपनियों के सामने अपनी सप्लाई चेन को सुचारू रखने की बड़ी चुनौती है। यदि परिवहन मार्ग जल्द बहाल नहीं हुए, तो ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में इजाफा होना तय है।
निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को सलाह है कि वे अब केवल मानसून की तीव्रता नहीं, बल्कि हाईवे की बहाली और बांधों के जलस्तर पर कड़ी नजर रखें। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक इस कॉरिडोर पर निर्भर कंपनियों के ऑपरेशंस में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
