छत्तीसगढ़ के धमतरी में धार्मिक संस्थानों ने अब केवल सदस्यों को ही प्रार्थना सभा में आने की अनुमति देने का फैसला किया है। कड़े एंटी-कन्वर्जन कानूनों और प्रशासनिक दबाव के कारण चर्चों ने यह एहतियाती कदम उठाया है।
छत्तीसगढ़ के धमतरी में चर्च प्रबंधन ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए अपनी प्रार्थना सभाओं में बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। अब केवल ईसाई समुदाय के सदस्य ही इन सभाओं में शामिल हो सकेंगे। यह कदम राज्य में लागू सख्त एंटी-कन्वर्जन कानूनों के तहत संभावित कानूनी मुश्किलों से बचने के लिए उठाया गया है।
कानूनी जोखिम और जुर्माने का डर
राज्य में नियमों का दायरा काफी कड़ा कर दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत अनधिकृत धर्मांतरण के मामलों में ₹25 लाख तक का भारी जुर्माना लग सकता है। वहीं, बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। इन कड़े कानूनों को देखते हुए चर्चों ने अपने परिसरों में नोटिस बोर्ड लगा दिए हैं, ताकि कानूनी जिम्मेदारी संस्थानों के बजाय आने वाले व्यक्ति पर रहे।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह निर्णय 15 सितंबर को जिला कलेक्ट्रेट में हुई एक तनावपूर्ण बैठक के बाद लिया गया। ईसाई प्रतिनिधियों का आरोप है कि उन्हें बिना जानकारी दिए ऐसी बैठक में बुलाया गया जहाँ दक्षिणपंथी समूह मौजूद थे। इन समूहों ने प्रार्थना सभाओं में गैर-ईसाई लोगों की भागीदारी पूरी तरह बंद करने की मांग की, जिसे स्थानीय अधिकारियों का भी समर्थन मिला।
आगे की स्थिति
इसके जवाब में 'धमतरी डिस्ट्रिक्ट क्रिश्चियन फोरम' ने सभी चर्चों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे पहले 1,000 से ज्यादा लोगों ने जिला कार्यालय में यह शपथ पत्र जमा किया था कि उनकी भागीदारी पूरी तरह स्वैच्छिक है। हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई औपचारिक समाधान नहीं निकला है, जिससे स्थानीय स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
