राम मंदिर ट्रस्ट में घमासान! चंपत राय के पत्र पर नृपेंद्र मिश्रा का पलटवार, कहा- 'मनगढ़ंत कहानी'

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
राम मंदिर ट्रस्ट में घमासान! चंपत राय के पत्र पर नृपेंद्र मिश्रा का पलटवार, कहा- 'मनगढ़ंत कहानी'

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने ट्रस्ट के प्रबंधन और निर्माण से जुड़े फैसलों का खुलासा करने वाला एक पत्र जारी किया है। वहीं, मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्रा ने इस पत्र को 'मनगढ़ंत कहानी' कहकर खारिज कर दिया है। यह विवाद जून 2026 में राय के इस्तीफे और दान राशि चोरी के मामले में SIT से मिली हरी झंडी के बाद सामने आया है।

चंपत राय ने खोला चिट्ठा!

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने 21 अगस्त 2026 को नौ पन्नों का एक पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने राम मंदिर के प्रबंधन और निर्माण प्रक्रिया पर अपने विचार रखे हैं। पत्र में दावा किया गया है कि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अक्सर एकतरफा फैसले लेते थे, जिससे संचालन में दिक्कतें आती थीं।

अपने बयान में, राय ने ट्रस्ट के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे पर जोर दिया और प्रशासनिक व निर्माण संबंधी फैसलों में पारदर्शिता की जरूरत बताई। उन्होंने संकेत दिया कि भले ही समिति को सभी बड़े फैसलों के लिए मुख्य अथॉरिटी बनाया गया था, लेकिन असल में नियंत्रण और अधिकार को लेकर अंदरूनी कलह थी। पत्र में निर्माण एजेंसियों के चयन और आर्किटेक्चरल देखरेख सहित प्रोजेक्ट के ऐतिहासिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है, ताकि ट्रस्ट और बाहरी विशेषज्ञों की भूमिकाओं को स्पष्ट किया जा सके।

नृपेंद्र मिश्रा का खंडन

पत्र सामने आने के तुरंत बाद, नृपेंद्र मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से इसके दावों का खंडन किया। मिश्रा ने कहा कि उन्होंने पत्र देखा नहीं है और इसे पूरी तरह 'मनगढ़ंत कहानी' बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने समिति के कामकाज को लेकर किसी भी आंतरिक मतभेद से इनकार किया। यह सार्वजनिक बयान मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दो प्रमुख व्यक्तियों के बीच एक स्पष्ट असहमति को दर्शाता है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह सब ऐसे समय में हुआ है जब ट्रस्ट में बड़े प्रबंधन बदलाव हुए हैं। चंपत राय ने जून 2026 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जो भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की व्यापक जांच के साथ हुआ था। 18 अगस्त 2026 को, एक विशेष जांच दल (SIT) ने राय और एक अन्य ट्रस्टी अनिल मिश्रा को इन आरोपों से बरी कर दिया था, यह निष्कर्ष निकालते हुए कि दान राशि की चोरी के दावों का समर्थन करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे।

चूंकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक धार्मिक और धर्मार्थ संस्थान है, न कि कोई सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध वाणिज्यिक इकाई, इसलिए यह प्रबंधन विवाद शेयर बाजार को प्रभावित नहीं करते हैं। हालांकि, ट्रस्ट का कामकाज जनता के लिए रुचि का विषय बना हुआ है। वरिष्ठ नेतृत्व के बीच मौजूदा मतभेद प्रशासनिक पारदर्शिता और आंतरिक प्रबंधन प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों को उजागर करते हैं। नेतृत्व में इस साल की शुरुआत में हुए बदलाव के बाद हितधारकों और जनता को यह देखने की उम्मीद होगी कि ट्रस्ट इन प्रशासनिक चिंताओं का समाधान कैसे करता है और संचालन में निरंतरता बनाए रखता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.