NEET-UG 2026 विवाद के बाद केंद्र सरकार ने NTA में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। पांच वरिष्ठ नौकरशाहों की नियुक्ति और चार-स्तरीय वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल के जरिए संस्थान की साख बहाल करने की कोशिश की जा रही है।
NEET-UG 2026 परीक्षा के बाद मचे हंगामे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद, सरकार ने National Testing Agency (NTA) में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन किया है। सरकारी आदेश के अनुसार, अंशुमन शर्मा को जॉइंट सेक्रेटरी, जबकि सत्य एस, रवि कुमार सिंह, प्रसन्ना वेंकटेश वी को डायरेक्टर और अमित समदरिया को जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है।
रिफॉर्म्स की कमान और नई रणनीति
इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल टास्क फोर्स इन सुधारों को दिशा दे रही है। एजेंसी अब 4-स्तरीय क्वेश्चन पेपर वेरिफिकेशन सिस्टम पर काम कर रही है। अब तक 50 से ज्यादा पुराने एक्सपर्ट्स को हटाया जा चुका है और टेक्नोलॉजी व सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की भर्ती पर जोर दिया जा रहा है।
एजुकेशन सेक्टर के लिए क्या हैं मायने?
देश का पूरा कोचिंग और एड-टेक इकोसिस्टम इन परीक्षाओं की स्थिरता पर निर्भर करता है। 'मेगा-एग्जाम' मॉडल को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, क्योंकि एक ही दिन में लाखों छात्रों की परीक्षा होने से सिस्टम पर भारी दबाव रहता है। अब NTA पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग और CISF जैसी सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती जैसे ठोस विकल्पों पर विचार कर रही है। आने वाले समय में नीलेकणी टास्क फोर्स की सिफारिशें इन परीक्षाओं के भविष्य और कोचिंग इंडस्ट्री की डिमांड को तय करेंगी।
