Amethi में एविएशन यूनिवर्सिटी का होगा विस्तार, केंद्र सरकार ने दी 500 एकड़ जमीन की मंजूरी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Amethi में एविएशन यूनिवर्सिटी का होगा विस्तार, केंद्र सरकार ने दी 500 एकड़ जमीन की मंजूरी

केंद्र सरकार ने अमेठी में राजीव गांधी राष्ट्रीय उड्डयन विश्वविद्यालय (RGNAU) के विस्तार के लिए 500 एकड़ जमीन को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट का मकसद उन्नत एयरोस्पेस रिसर्च फैसिलिटी स्थापित करना और 2033 तक छात्रों की क्षमता को बढ़ाकर 17,000 करना है। यह पहल भारत में एविएशन शिक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित है।

अमेठी में एविएशन यूनिवर्सिटी के विस्तार को मंजूरी

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के अमेठी में स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय उड्डयन विश्वविद्यालय (RGNAU) के विस्तार के लिए आधिकारिक तौर पर 500 एकड़ अतिरिक्त जमीन आवंटित करने की मंजूरी दे दी है। यह कदम विश्वविद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर और एविशन व एयरोस्पेस सेक्टर में रिसर्च क्षमताओं को बढ़ाने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा है।

एयरोस्पेस क्षमताओं का विस्तार

इस मंजूर की गई जमीन का उपयोग एक अत्याधुनिक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के निर्माण के लिए किया जाएगा। साइट की योजनाओं में एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई एडवांस्ड लैबोरेटरीज और विशेष रिसर्च सेंटर शामिल हैं। वर्तमान में, यह विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना 2013 में हुई थी, 595 छात्रों के काफी छोटे बेस के साथ संचालित होता है। नए विस्तार की योजना 2033 तक छात्र संख्या को बढ़ाकर 17,000 करने की ग्रोथ स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है।

इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए, नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने उत्तर प्रदेश सरकार को भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में सहायता करने का निर्देश दिया है। विस्तार के लिए आवश्यक क्षेत्र को चिह्नित करने के लिए भूमि सर्वेक्षण पहले से ही चल रहा है। विश्वविद्यालय देश भर में एफिलिएटेड संस्थानों के अपने नेटवर्क का विस्तार करके अपनी अकादमिक पहुंच का विस्तार करने का भी इरादा रखता है।

प्रोजेक्ट की प्रकृति

पाठकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि राजीव Gandhi National Aviation University एक केंद्रीय सार्वजनिक विश्वविद्यालय है, न कि कोई लिस्टेड कंपनी। यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ट्रेड नहीं करता है, और इसलिए इसका कोई शेयर प्राइस, मार्केट कैप या ट्रेडिंग हिस्ट्री नहीं है। इस संस्थान को नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा फंड और पर्यवेक्षण किया जाता है।

भारत में अधिकांश बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तरह, इस विस्तार के लिए प्राथमिक मॉनिटर करने योग्य कारक भूमि अधिग्रहण की समय-सीमा और उसके बाद निर्माण का आरंभ होगा। एविएशन और डिफेंस सेक्टर में रुचि रखने वाले निवेशक और हितधारक अक्सर कुशल कार्यबल की उपलब्धता और रिसर्च आउटपुट पर दीर्घकालिक प्रभाव के लिए ऐसे विकासों पर नज़र रखते हैं, हालांकि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से शैक्षिक और सरकारी नेतृत्व वाला है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.