केंद्र सरकार ने मद्रास, कलकत्ता, कर्नाटक और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट्स में जजों के खाली पदों को भरने के लिए 30 नए जजों की नियुक्ति की है। इस कदम से मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और देश की 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' रैंकिंग सुधरेगी।
ज्यूडिशियरी में आए 30 नए जज
केंद्र सरकार ने जजों के खाली पदों को भरने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कानून और न्याय मंत्रालय ने चार हाई कोर्ट्स - मद्रास, कलकत्ता, कर्नाटक और मध्य प्रदेश - में कुल 30 जजों की नियुक्ति की पुष्टि की है। इस नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य लंबित पड़े मामलों के बोझ को कम करना और न्यायपालिका के कामकाज में सुधार लाना है।
किस हाई कोर्ट में कितने जज?
नियुक्तियों का सबसे बड़ा हिस्सा मद्रास हाई कोर्ट को मिला है, जहाँ 15 नए जजों को शामिल किया गया है। इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट में 8 नए जजों को नियुक्त किया गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट को 6 जज मिले हैं, जबकि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 1 नया जज नियुक्त हुआ है। इन जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ सलाह-मशविरे के बाद की है, जो सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों पर आधारित है।
'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर असर
भारत की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या एक बड़ी चिंता का विषय है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में लगभग 5.58 करोड़ मामले लंबित हैं। कानूनी और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि न्याय प्रणाली को अधिक कुशल बनाना 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तेज न्यायिक व्यवस्था अनुबंधों को लागू करने, व्यावसायिक विवादों को सुलझाने और नियामक मामलों को तेजी से निपटाने में मदद करती है, जिससे व्यवसायों और व्यक्तियों पर समय और लागत का बोझ कम होता है।
यह नियुक्ति सीधे तौर पर कंपनियों की कमाई या शेयर बाजार के भावों को प्रभावित नहीं करती है, लेकिन यह सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में एक सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। इन नियुक्तियों का असर मामलों के निपटान की गति और लंबित मामलों की संख्या में कमी के रूप में आने वाली तिमाहियों में देखा जाएगा।
नए नियुक्त जज जल्द ही शपथ ग्रहण करने के बाद अपना कार्यभार संभालेंगे। उम्मीद है कि सरकार अन्य हाई कोर्ट्स में भी खाली पदों को भरने की दिशा में काम जारी रखेगी।
