Ceat के शेयरों में आज बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के जून तिमाही के मार्जिन में आई कमी के कारण शेयर **9%** तक गिर गए। हालांकि, नेट सेल्स **18%** बढ़ी, लेकिन रबर और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने मुनाफे पर दबाव डाला।
मार्जिन पर आया दबाव
टायर निर्माता कंपनी Ceat के शेयरों में शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 9% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट कंपनी के जून तिमाही के नतीजों के बाद आई है। कंपनी ने बताया कि इस अवधि में 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए स्टैंडअलोन नेट सेल्स में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 18% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹4,163 करोड़ तक पहुंच गई। लेकिन, निवेशकों का ध्यान मुनाफे के मेट्रिक्स में आई तेज गिरावट पर गया।
कच्चे माल की लागत बनी बड़ी वजह
कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रॉस मार्जिन में पिछली तिमाही की तुलना में लगभग 625 बेसिस पॉइंट्स की कमी आई और यह 33.4% पर आ गया। इसी तरह, EBITDA मार्जिन, जो ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी का एक अहम पैमाना है, 9.1% तक गिर गया, जो पिछली तिमाही से लगभग 540 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट दर्शाता है। इस भारी दबाव की मुख्य वजह कच्चे माल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी है। खासकर, नेचुरल रबर और ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में इजाफे ने प्रोडक्शन कॉस्ट को बढ़ा दिया है, जिससे कंपनी के लिए मार्जिन बनाए रखना एक चुनौती बन गया है, भले ही नेट सेल्स तिमाही-दर-तिमाही 3% बढ़ी हो।
सेक्टर और मार्केट का हाल
Ceat के शेयर में गिरावट मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में व्यापक प्रॉफिट-टेकिंग के बीच हुई। शुक्रवार को Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 दोनों इंडेक्स लगभग 0.6% नीचे कारोबार कर रहे थे। यह गिरावट इस फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में हुई तेज रैली के बाद आई है, जिसमें Nifty Midcap 100 अप्रैल से 18% और Nifty Smallcap 100 26% चढ़े थे, जो Nifty 50 बेंचमार्क से काफी बेहतर प्रदर्शन था।
इंडस्ट्रियल स्पेस की अन्य कंपनियों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। Polycab India के शेयर 4% और KEI Industries के शेयर 3.5% गिरे। Polycab ने जून तिमाही में ₹8,210 करोड़ का 39% ईयर-ऑन-ईयर रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज किया, लेकिन इसके मार्जिन में भी मामूली 68 बेसिस पॉइंट्स की कमी आई, जो 13.8% रहा। Polycab ने एक्सपोर्ट रेवेन्यू में 13% की गिरावट का भी उल्लेख किया, जो यह दर्शाता है कि सेक्टर के प्रतिभागी वर्तमान में ग्लोबल डिमांड और कमोडिटी प्राइस की अस्थिरता से जुड़ी चुनौतियों से निपट रहे हैं।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों के लिए Ceat की सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह बढ़ती कच्चे माल की कीमतों का बोझ ग्राहकों पर कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए कितना डाल पाती है। चूंकि कमोडिटी इन्फ्लेशन ऑटोमोटिव कंपोनेंट सेक्टर के लिए एक चुनौती बनी हुई है, ऐसे में मार्केट पार्टिसिपेंट्स आने वाली तिमाहियों में मैनेजमेंट की कॉस्ट-कंट्रोल मेजर्स और डोमेस्टिक रिप्लेसमेंट व ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) सेगमेंट में डिमांड ट्रेंड्स पर कंपनी की कमेंट्री पर नजर रखेंगे।
