Capria Ventures ने अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी को पूरी तरह से बदल दिया है। अब कंपनी एजुकेशन और हेल्थ टेक को छोड़कर एंटरप्राइज AI और मैन्युफैक्चरिंग ऑटोमेशन में निवेश करेगी, जिसके लिए उनके पास करीब **₹2,000 करोड़** का फंड तैयार है।
बदल गया इन्वेस्टमेंट का फोकस
प्राइवेट वेंचर कैपिटल फर्म Capria Ventures ने अपने निवेश के लक्ष्यों में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने अब अपना पूरा ध्यान 'ग्लोबल साउथ' (Global South) में एंटरप्राइज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मैन्युफैक्चरिंग ऑटोमेशन पर केंद्रित कर दिया है। पहले कंपनी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के स्टार्टअप्स पर दांव लगाती थी, लेकिन अब वे इंडस्ट्रियल टेक में उभरते अवसरों को भुनाना चाहते हैं।
कंपनी के पास फिलहाल करीब ₹2,000 करोड़ का फंड मौजूद है। मैनेजिंग पार्टनर सूर्या मंधा के मुताबिक, वे उन स्टार्टअप्स को चुन रहे हैं जो अपने इंजीनियरिंग और प्रोपराइटरी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) के दम पर सप्लाई चेन और फैक्ट्री की समस्याओं को हल कर सकें।
क्यों है यह बदलाव?
भारत की बदलती भूमिका और ग्लोबल सप्लाई चेन में बढ़ती अहमियत के चलते ऐसी तकनीक की भारी मांग है जो सीधे तौर पर प्रोडक्टिविटी बढ़ा सके। फर्म का लक्ष्य करीब 25 स्टार्टअप्स को फंड करना है, जिसमें फॉलो-ऑन राउंड्स के लिए भी रिजर्व रखा गया है। निवेश का मुख्य पैमाना यह है कि ग्राहक उस तकनीक के लिए पैसा देने को तैयार हैं या नहीं। साथ ही, कंपनी अब एग्जिट के लिए सिर्फ स्ट्रेटेजिक सेल ही नहीं, बल्कि IPO को भी एक मजबूत विकल्प के तौर पर देख रही है।
क्या हैं चुनौतियां और जोखिम?
यह क्षेत्र जितना आकर्षक है, उतना ही जोखिम भरा भी है। असल में, ज्यादातर AI पायलट प्रोजेक्ट्स फैक्ट्री फ्लोर पर सफल होने में नाकाम रहते हैं। 'AI प्रोटोटाइप' से 'लार्ज-स्केल मैन्युफैक्चरिंग' तक का सफर तय करना सबसे बड़ी चुनौती है। चूंकि यह एक प्राइवेट वेंचर कैपिटल है, तो निवेशकों के लिए कोई रोजाना का शेयर प्राइस मूवमेंट नहीं होगा, बल्कि पूरी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये स्टार्टअप्स अपनी टेक्नोलॉजी को इंडस्ट्री के माहौल में कितनी अच्छी तरह स्केल कर पाते हैं।
