₹90 लाख सैलरी ठुकराई! मैनेजर के साथ तालमेल बिठाना ज्यादा जरूरी, टैलेंट के लिए लीडरशिप है पहली पसंद

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AuthorNeha Patil|Published at:
₹90 लाख सैलरी ठुकराई! मैनेजर के साथ तालमेल बिठाना ज्यादा जरूरी, टैलेंट के लिए लीडरशिप है पहली पसंद

एक बड़े रिक्रूटमेंट मामले में एक कैंडिडेट ने **₹90 लाख** सालाना सैलरी वाले ऑफर को ठुकरा दिया है। वजह पैसों की कमी नहीं, बल्कि अपने होने वाले डायरेक्ट मैनेजर के साथ तालमेल को लेकर चिंता थी। यह घटना बताती है कि आज के कॉर्पोरेट माहौल में लीडरशिप की क्वालिटी टॉप टैलेंट को आकर्षित करने और बनाए रखने में कितनी अहमियत रखती है।

हायरिंग की प्रायोरिटी में आया बड़ा बदलाव

आजकल के कॉम्पिटिटिव जॉब मार्केट में कंपनियां अक्सर हाई-एंड टैलेंट को लुभाने और बनाए रखने के लिए भारी-भरकम सैलरी पैकेज का सहारा लेती हैं। लेकिन, इस केस से यह साफ होता है कि अगर कंपनी का कल्चर या रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर कैंडिडेट को पसंद न आए, तो एक आकर्षक ऑफर भी बेअसर साबित हो सकता है। एचआर कंसल्टेंट मनोज कुमार द्वारा शेयर की गई इस घटना ने इस बात पर जोर दिया है कि स्किल्ड प्रोफेशनल अब सैलरी के साथ-साथ अपने मैनेजर के साथ प्रोफेशनल रिश्ते को भी उतनी ही अहमियत दे रहे हैं।

लीडरशिप ही बिजनेस की सबसे बड़ी असेट

निवेशकों और कॉर्पोरेट स्टेकहोल्डर्स के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है। यह इन-इफेक्टिव लीडरशिप का एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क बताता है। लीडरशिप रोल्स में हाई टर्नओवर की वजह से हायरिंग कॉस्ट बढ़ जाती है, प्रोडक्टिविटी लॉस होती है और कंपनी की इंटेलेक्चुअल कैपिटल का नुकसान हो सकता है। जब कंपनियां एक हेल्दी लीडरशिप कल्चर बनाने में फेल होती हैं, तो उन्हें बेस्ट टैलेंट को सिक्योर करने में मुश्किल होती है, जिसका सीधा असर टीम की परफॉर्मेंस और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन पर पड़ता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि मैनेजमेंट के तरीके, जैसे कि जरूरत से ज्यादा माइक्रो-मैनेजमेंट या खराब कम्युनिकेशन, टॉप कैंडिडेट्स के लिए बड़े डील-ब्रेकर बन गए हैं।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

हालांकि यह एक सिंगल केस है, लेकिन यह किसी भी ऑर्गनाइजेशन की इंटरनल हेल्थ का एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है। निवेशक किसी कंपनी की ह्यूमन कैपिटल को आंकने के लिए अक्सर एट्रीशन रेट (कर्मचारी छोड़ने की दर), ग्लासडोर रेटिंग्स और मैनेजमेंट की स्थिरता जैसे फैक्टर्स को ट्रैक करते हैं। अगर किसी कंपनी में लीडरशिप लगातार बदल रही है या वर्क कल्चर खराब होने की खबरें आ रही हैं, तो यह अंदरूनी गवर्नेंस या ऑपरेशनल समस्याओं का संकेत हो सकता है। भविष्य में, यह देखना होगा कि एचआर पॉलिसीज और लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम कितने कारगर साबित होते हैं, ताकि कंपनियां अपने क्रिटिकल टैलेंट को कॉम्पिटिटर्स के हाथों खोए बिना ग्रोथ सस्टेन कर सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.