Union Cabinet ने 'Khelo India' स्कीम के तहत स्पोर्ट्स इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए **₹1,856.67 करोड़** के फंड को मंजूरी दी है। यह प्लान **2026** से **2034** के बीच घरेलू उत्पादन बढ़ाने और इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने पर केंद्रित है।
मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा नया बूस्ट
सरकार का मुख्य उद्देश्य भारत के बिखरे हुए स्पोर्ट्स इक्विपमेंट सेक्टर को एक कॉम्पिटिटिव और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड इंडस्ट्री में बदलना है। इस प्लान के तहत सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंशियल सपोर्ट दोनों पर काम करेगी। कुल फंड में से ₹1,130 करोड़ केवल टर्नओवर-लिंक्ड इंसेंटिव्स के लिए रखे गए हैं, ताकि कंपनियां छोटे स्तर से निकलकर बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकें। इसके अलावा, ₹105 करोड़ स्थानीय कंपनियों को ग्लोबल स्टैंडर्ड की क्वालिटी और सेफ्टी सर्टिफिकेशन हासिल करने में मदद करने के लिए आवंटित किए गए हैं, जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एंट्री के लिए एक बड़ी बाधा होते हैं।
खास मैन्युफैक्चरिंग जोन की तैयारी
इस पहल का एक अहम हिस्सा 'स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन' बनाना है। इसके तहत सप्लायर्स, टेस्टिंग लैब्स और डिजाइनर्स को एक ही छत के नीचे लाया जाएगा, जिससे काम की लागत कम होगी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी। इस काम के लिए National Industrial Corridor Development Corporation की मदद ली जाएगी ताकि क्लस्टर बनाने की प्रक्रिया में तेजी आए।
बाजार का भविष्य और निवेशकों के लिए संकेत
भारत का स्पोर्ट्स गुड्स मार्केट अभी जालंधर और मेरठ जैसे शहरों तक सीमित है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट में मुकाबला करने के लिए बड़े पैमाने पर ऑटोमेटेड सेटअप की जरूरत है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे स्थानीय कंपनियां इन क्लस्टर्स का लाभ उठाकर अपनी स्केल बढ़ाती हैं। लंबे समय में, किसी भी कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी जल्दी अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन को पार कर इंपोर्टेड सामान को रिप्लेस कर पाती हैं।
