देश की सबसे बड़ी अर्धसैनिक बल, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) ने अपने जवानों के बीच बढ़ती खुदकुशी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए एक 10 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। साल 2025 में जवानों की खुदकुशी के **59** मामले सामने आए हैं, जो पिछले पांच सालों का रिकॉर्ड तोड़ हैं।
क्या है पूरा मामला?
CRPF, जो भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों की एक 10-सदस्यीय कमेटी बनाई है। इस कमेटी का मकसद जवानों के बीच खुदकुशी के बढ़ते मामलों की जड़ तक पहुंचना और उनका समाधान खोजना है। साल 2025 में जवानों की खुदकुशी के 59 मामले दर्ज किए गए, जो कि पिछले पांच सालों में सबसे अधिक हैं। इस कमेटी की अध्यक्षता CRPF के महानिदेशक (Director General) करेंगे और यह हर महीने बैठकें करेंगी। इन बैठकों में हर मामले की गहराई से समीक्षा की जाएगी और मानसिक स्वास्थ्य, कल्याण व प्रशासनिक सहायता में सुधार के लिए संस्थागत उपायों का प्रस्ताव दिया जाएगा।
NHRC की दखल
यह कदम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्वतः संज्ञान लेने के बाद उठाया गया है। NHRC ने 14 अगस्त को इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव और CRPF महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो हफ्तों के भीतर जवानों के कल्याण और काम करने की परिस्थितियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। NHRC का यह हस्तक्षेप उच्च दबाव वाली परिस्थितियों में काम करने वाले जवानों के जीवन के अधिकार के संभावित उल्लंघनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, इस मुद्दे की संस्थागत गंभीरता को उजागर करता है।
चौंकाने वाले आंकड़े
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खुदकुशी के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। 2024 में जहां 46 ऐसे मामले थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 59 हो गई। इन आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि 80% से अधिक मामले कांस्टेबल स्तर के जवानों के हैं। इसके अलावा, लगभग 77% मौतें तब हुईं जब जवान ड्यूटी पर थे, न कि छुट्टी पर। यह आंकड़ा जमीनी हकीकत को बयां करता है, क्योंकि CRPF अपनी लगभग पूरी ताकत हर समय आतंकवाद विरोधी और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात रखती है।
शेयर बाजार पर कोई असर नहीं
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि CRPF एक सरकारी प्रबंधित अर्धसैनिक बल है और यह NSE या BSE पर सूचीबद्ध कंपनी नहीं है। इसलिए, इस घटना का शेयर बाजार पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के बजट और प्रबंधन दक्षता पर नजर रखने वाले विश्लेषकों और हितधारकों के लिए इस पैनल का गठन अत्यंत महत्वपूर्ण है। बल की परिचालन तत्परता बनाए रखने के लिए मानव संसाधन संबंधी चुनौतियों - जैसे जवानों की तैनाती पैटर्न, परिवार से अलगाव और कार्य-जीवन संतुलन - को संबोधित करने की क्षमता आवश्यक है। भविष्य के अपडेट संभवतः इस नई कमेटी की सिफारिशों और कल्याणकारी खर्चों या तैनाती रणनीतियों में किसी भी नीतिगत बदलाव पर केंद्रित होंगे।
