आर्मेनिया में संपन्न हुई UN Biodiversity Conference (COP17) में 'Yerevan Pathway' को मंजूरी मिल गई है। इस समझौते के लिए **$2 बिलियन** की नई फंडिंग का ऐलान हुआ है, लेकिन निवेशकों के लिए असली चिंता सब्सिडी में होने वाले बदलावों को लेकर है, जो माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों को प्रभावित कर सकते हैं।
आर्मेनिया के येरेवन में 31 अक्टूबर, 2026 को 17वीं Convention on Biological Diversity (COP17) का समापन हुआ। इस समिट में 'Yerevan Pathway' को अपनाया गया है, जो 2030 तक कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क (KMGBF) के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक रोडमैप के रूप में काम करेगा।
निवेशकों के लिए सबक
समिट के दौरान $2 बिलियन की नई फंडिंग जुटी है, लेकिन बाजार जानकारों के लिए सबसे बड़ी खबर 'नेचर-हार्मिंग सब्सिडी' (पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सब्सिडी) को धीरे-धीरे खत्म करने का संकल्प है।
- सेक्टर पर असर: इंडस्ट्रियल एग्रीकल्चर, माइनिंग, केमिकल मैन्युफैक्चरिंग और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सरकार से मिलने वाली रियायतों पर अब तलवार लटक सकती है। अगर सरकारी नीतियां 'Yerevan Pathway' के अनुरूप बदलती हैं, तो इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आना तय है।
- बढ़ते रेगुलेटरी नॉर्म्स: कंपनियों को अब अपनी 'नेचर डिपेंडेंसी' (प्रकृति पर निर्भरता) को रिपोर्ट करना होगा। निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो अपनी सप्लाई चेन को इन नए नियमों के हिसाब से ढाल रही हैं।
चूंकि ग्लोबल बायोडायवर्सिटी के लक्ष्य अभी भी पटरी से उतरे हुए हैं, इसलिए 2028 में इक्वाडोर में होने वाली अगली समिट से पहले सरकारों पर कड़े नीतिगत बदलावों का दबाव बढ़ेगा। जो कंपनियां समय रहते अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करेंगी, वे भविष्य में होने वाले बड़े ऑपरेशनल रिस्क से बच सकेंगी।
