CMR Green Tech IPO: निवेशकों का जबरदस्त उत्साह! बाजार की गिरावट के बावजूद **123** गुना सब्सक्राइब

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AuthorMehul Desai|Published at:
CMR Green Tech IPO: निवेशकों का जबरदस्त उत्साह! बाजार की गिरावट के बावजूद **123** गुना सब्सक्राइब
Overview

CMR Green Technologies का ₹630.62 करोड़ का IPO बाजार की चुनौतियों के बावजूद **123** गुना सब्सक्राइब हुआ है। संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की भारी मांग ने इसे लीड किया। यह कंपनी रिसाइकल्ड एल्यूमीनियम सेक्टर में लीडर है, लेकिन निवेशकों को कमोडिटी कीमतों की अस्थिरता, पतले ऑपरेटिंग मार्जिन और ग्राहकों पर अधिक निर्भरता जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

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सब्सक्रिप्शन में आई तूफानी तेजी

CMR Green Technologies के पब्लिक ऑफर (Public Offering) में 123.11 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन देखने को मिला, जो प्राइमरी मार्केट में अस्थिरता के बावजूद इंडस्ट्रियल रीसाइक्लिंग में मजबूत रुचि का संकेत देता है। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने 262.15 गुना बिड करके इस मांग का नेतृत्व किया, वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) ने 169.65 गुना निवेश किया। यह उत्साह ऐसे समय में आया है जब निफ्टी 50 में हालिया उतार-चढ़ाव और बढ़ती महंगाई के दबाव के कारण भारतीय बाजार में निवेशक अधिक सतर्क हो गए हैं।

कंपनी की मजबूत स्थिति

कैपेसिटी के मामले में भारत के सेकेंडरी एल्यूमीनियम इंडस्ट्री में सबसे बड़ी कंपनी होने के नाते, CMR Green Technologies ऑटोमोटिव सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। 6,15,000 MTPA से अधिक की प्रोडक्शन कैपेसिटी के साथ, कंपनी ने Maruti Suzuki और Bajaj Auto जैसे प्रमुख OEM के साथ लंबे समय के रिश्ते बनाए हैं। जापानी पार्टनर्स Toyota Tsusho, Nikkei MC Aluminium, और Nippon Light Metal के साथ इसके स्ट्रेटेजिक ज्वाइंट वेंचर्स (Joint Ventures) इसे एडवांस्ड कास्टिंग टेक्नोलॉजी और मोल्टेन मेटल सप्लाई में एक ऑपरेशनल एज देते हैं। ये पार्टनरशिप 42% से 45% तक के कास्ट एलॉय ऑटोमोटिव सेगमेंट में इसके मार्केट शेयर की सुरक्षा करते हुए महत्वपूर्ण एंट्री बैरियर का काम करती हैं।

बारीकियाँ और चिंताएं

हालांकि सब्सक्रिप्शन के आंकड़े मजबूत दिख रहे हैं, कंपनी की अंदरूनी फाइनेंशियल्स पर एक गहरी नजर डालने की जरूरत है। यह एक 100% ऑफर-फॉर-सेल (Offer-for-Sale) है, जिसका मतलब है कि IPO से कंपनी को कोई पैसा नहीं मिलेगा; सारा फंड सीधे प्रमोटर्स और मौजूदा शेयरधारकों के पास जाएगा। कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी ऐतिहासिक रूप से अस्थिर रही है, FY24 में ₹838.56 करोड़ का भारी नुकसान दर्ज किया गया था, जो मुख्य रूप से गुडविल राइट-ऑफ के कारण था। हालांकि, FY25 में यह सुधरकर ₹155 करोड़ हो गया।

ऑपरेशनल जोखिम काफी ज्यादा हैं। यह फर्म लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) की कीमतों की अस्थिरता के प्रति काफी संवेदनशील है, क्योंकि इसके पतले मार्जिन इंपोर्टेड स्क्रैप की लागत के प्रति बहुत संवेदनशील हैं। हाल के फाइनेंशियल पीरियड्स में कच्चे माल का 70% से अधिक इसी से आता था। इसके अलावा, क्लाइंट कंसंट्रेशन (Client Concentration) एक स्ट्रक्चरल कमजोरी है; टॉप पांच ग्राहकों से लगभग एक तिहाई रेवेन्यू आता है, ऐसे में किसी एक बड़े ऑटोमोटिव कॉन्ट्रैक्ट के खत्म होने से कैश फ्लो पर बुरा असर पड़ सकता है। कंपनी निगेटिव फ्री कैश फ्लो (Negative Free Cash Flow) के साथ काम कर रही है, जिससे वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट की जरूरत बनी रहती है और बिजनेस फॉरेन एक्सचेंज फ्लक्चुएशन के प्रति भी संवेदनशील रहता है।

भविष्य का नज़रिया

बाजार प्रतिभागी अब 10 जून की लिस्टिंग डेट पर नजरें टिकाए हुए हैं, यह देखने के लिए कि क्या ग्रे मार्केट प्रीमियम (Grey Market Premium) लगभग ₹70 को बनाए रखा जा सकता है। हालांकि हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) की ओर बदलाव और सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) को बढ़ावा देने जैसे लंबे समय के टेलविंड्स (Tailwinds) इंडस्ट्री का समर्थन करते हैं, लेकिन छोटी अवधि का प्रदर्शन कच्चे माल की कीमतों की स्थिरता और एक प्रतिस्पर्धी रीसाइक्लिंग माहौल में कंपनी की मार्जिन प्रोफाइल बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.