सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) अब टैक्सपेयर्स के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS में विदेशी वित्तीय जानकारी भी शामिल करेगा। इस कदम से इंडिविजुअल्स को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले विदेशी डेटा को रीकन्साइल करने में मदद मिलेगी।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने विदेशी संपत्ति से जुड़े एक बड़े नियम का ऐलान किया है। अब इंटरनेशनल एग्रीमेंट्स के तहत मिली विदेशी वित्तीय जानकारी सीधे टैक्सपेयर्स के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS में दिखाई जाएगी। 8 जुलाई, 2026 के आदेश में यह बात साफ की गई है। इसका मकसद ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना है, ताकि इंडिविजुअल्स इनकम टैक्स रिटर्न फाइनल करने से पहले सरकार के पास मौजूद विदेशी वित्तीय डिटेल्स को देख सकें।
टैक्स स्टेटमेंट्स में ग्लोबल डेटा इंटीग्रेशन
पहले, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) और फॉरेन अकाउंट टैक्स कंप्लायंस एक्ट (FATCA) जैसे फ्रेमवर्क के तहत अलग-अलग देशों से वित्तीय अकाउंट डेटा प्राप्त करता रहा है। मगर, यह जानकारी डिपार्टमेंट के इंटरनल सिस्टम में ही रहती थी और टैक्सपेयर के लिए उपलब्ध नहीं होती थी। नए निर्देश के अनुसार, डायरेक्टर जनरल ऑफ इनकम-टैक्स (Systems) को यह ऑफशोर डेटा टैक्सपेयर के ऑफिशियल स्टेटमेंट्स में इंटीग्रेट करने का काम सौंपा गया है। इससे लोगों को अपने विदेशी बैंक अकाउंट्स और इनवेस्टमेंट्स की जानकारी मिल सकेगी, जो सरकार को ऑटोमैटिक एक्सचेंज चैनलों से प्राप्त हुई है।
डेटा उपलब्धता का टाइमलाइन
इस नए नियम के तहत जानकारी कब दिखेगी, इसकी एक साफ समय-सीमा तय कर दी गई है। कैलेंडर ईयर 2022, 2023 और 2024 के उस डेटा के लिए जो डिपार्टमेंट के पास अभी मौजूद है, उसे आदेश की तारीख से 90 दिनों के अंदर AIS और Form 26AS में अपलोड करना होगा। वहीं, कैलेंडर ईयर 2025 से संबंधित जानकारी के लिए, विदेशी टैक्स अथॉरिटीज से प्राप्त होने वाले महीने के अंत से 90 दिनों के अंदर डिपार्टमेंट को इस डेटा को स्टेटमेंट्स में दिखाना होगा।
टैक्सपेयर्स को क्या ध्यान देना चाहिए?
यह बदलाव टैक्सपेयर्स को बेहतर विजिबिलिटी तो देता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि किस तरह का डेटा रिपोर्ट किया जा रहा है। इंटरनेशनल एक्सचेंज एग्रीमेंट्स के तहत शेयर की जाने वाली जानकारी में आमतौर पर अकाउंट बैलेंस और ग्रॉस प्रोसीड्स शामिल होते हैं, न कि टैक्सेबल इनकम। इसके अलावा, टैक्सपेयर्स को यह भी ध्यान देना चाहिए कि AIS में किसी एंट्री के न होने से वे अपनी लीगल रिपोर्टिंग जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाते। कुछ देशों से डेटा में देरी या अनुपलब्धता हो सकती है।
इसलिए, विदेश में संपत्ति रखने वाले निवेशकों को अपने इनकम टैक्स रिटर्न में सभी विदेशी संपत्ति का सही-सही खुलासा करने पर ध्यान देना जारी रखना चाहिए, खासकर शेड्यूल FA, शेड्यूल FSI और शेड्यूल TR जैसे प्रासंगिक शेड्यूल्स में। इनकम-टैक्स एक्ट के तहत सभी विदेशी आय और संपत्ति की सही रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से टैक्सपेयर की ही है। ऐसी संपत्तियों का गलत खुलासा करने पर ब्लैक मनी (Undisclosed Foreign Income and Assets) एंड इम्प्ोज़िशन ऑफ टैक्स एक्ट के तहत रेगुलेटरी नतीजे हो सकते हैं।
