आयकर विभाग ने उन चैरिटी संस्थाओं को राहत दी है जो 80G रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल के लिए 30 सितंबर, 2025 की डेडलाइन चूक गई थीं। अब 31 मार्च, 2026 तक आवेदन करने वाले संस्थानों को मेरिट के आधार पर जांच का मौका मिलेगा, जिससे उन्हें टैक्स-कटौती योग्य डोनेशन (tax-deductible donations) मिलना जारी रहेगा। हालांकि, अंतिम मंजूरी के लिए नियमों का पालन करना अभी भी ज़रूरी है।
क्या हुआ?
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने सेक्शन 80G टैक्स छूट से जुड़ी प्रक्रिया में देरी का सामना कर रही चैरिटी संस्थाओं की मदद के लिए एक अहम निर्देश जारी किया है। इनकम टैक्स एक्ट के तहत, डोनेटर्स को अपने योगदान पर टैक्स में छूट (tax deductions) का दावा करने के लिए संस्थानों के पास वैध 80G सर्टिफिकेशन होना ज़रूरी है। जो संस्थाएं 30 सितंबर, 2025 की मूल डेडलाइन तक फॉर्म 10AB के ज़रिए अपना रिन्यूअल आवेदन जमा नहीं कर पाई थीं, उन्हें अब राहत मिली है। CBDT ने 1 अक्टूबर, 2025 से 31 मार्च, 2026 के बीच फाइल किए गए लेट एप्लीकेशंस को कंडोन (माफ़) कर दिया है, जिससे ये संस्थाएं तकनीकी चूक के कारण अपना टैक्स-फ्री स्टेटस (tax-exempt status) खोने से बच जाएंगी।
दाताओं और संस्थाओं के लिए क्यों ज़रूरी है?
सेक्शन 80G की मंजूरी नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन्स के लिए घरेलू फंडिंग (domestic funding) जुटाने के लिए बेहद ज़रूरी है। वैलिड रजिस्ट्रेशन के बिना, डोनर्स टैक्स बेनिफिट्स का दावा नहीं कर सकते, जिससे अक्सर संस्थाओं और व्यक्तियों से मिलने वाले डोनेशन में भारी गिरावट आती है। ग्रेस पीरियड (grace period) देकर, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वेरिफाइड चैरिटेबल एक्टिविटीज के लिए फंडिंग का प्रवाह बना रहे। यह कदम खासकर प्रोसेस की मुश्किलों को दूर करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि कई संस्थाओं को फॉर्म 10AB की डिजिटल फाइलिंग प्रक्रिया में एडमिनिस्ट्रेटिव दिक्कतें आईं।
समीक्षा प्रक्रिया
यह राहत अपने आप में मंजूरी की गारंटी नहीं है। CBDT ने प्रिंसिपल कमिश्नर्स और कमिश्नर्स ऑफ इनकम टैक्स को इन लेट एप्लीकेशन्स का व्यक्तिगत योग्यता (individual merits) के आधार पर मूल्यांकन करने का अधिकार दिया है। विस्तारित अवधि के दौरान सबमिट किए गए और केवल देरी के कारण पहले रिजेक्ट किए गए एप्लीकेशन्स पर अब अथॉरिटीज द्वारा फिर से विचार किया जाएगा। टैक्स डिपार्टमेंट ने इन फैसलों को 31 दिसंबर, 2026 तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है।
कंप्लायंस की हकीकत
भले ही यह एक्सटेंशन एडमिनिस्ट्रेटिव राहत प्रदान करता है, टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि मूल ज़रूरतें अभी भी सख्त हैं। संस्थाओं को अपने दस्तावेज़ों और ऑपरेशनल एक्टिविटीज़ की विस्तृत जांच के लिए तैयार रहना चाहिए। देरी माफ़ होने के बावजूद, अंतिम रिन्यूअल इस बात पर निर्भर करेगा कि संस्थान मौजूदा वैधानिक ढांचे (statutory framework) की ज़रूरतों को पूरा कर पाते हैं या नहीं। इनकम टैक्स छूट के प्रावधानों का पालन न करना एक बड़ा जोखिम बना हुआ है, और संस्थाओं को मेरिट-आधारित समीक्षा पास करने के लिए अपने रिकॉर्ड को सटीक और पारदर्शी रखना होगा।
संस्थाओं को क्या ट्रैक करना चाहिए?
जिन संस्थाओं ने अक्टूबर 2025 और मार्च 2026 के बीच फाइलिंग की है, उन्हें इनकम टैक्स पोर्टल के माध्यम से अपने फॉर्म 10AB एप्लीकेशन की स्थिति पर नज़र रखनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन एप्लीकेशन्स के फाइनल डिस्पोजल की डेडलाइन 31 दिसंबर, 2026 है। संस्थाओं को अपनी वित्तीय दस्तावेज़ और चैरिटेबल एक्टिविटीज़ के प्रमाण भी तैयार रखने चाहिए, क्योंकि टैक्स अथॉरिटीज मेरिट रिव्यू प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त जानकारी मांग सकती हैं।
