Confederation of All India Traders (CAIT) ने दिल्ली में हो रहे राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा रुख अपनाया है। त्योहारों और शादी के सीजन के बीच इन प्रदर्शनों से छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसके चलते CAIT ने अब बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
व्यापार बनाम विरोध का मुद्दा
राजधानी दिल्ली में चल रहे राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर व्यापारियों की सर्वोच्च संस्था CAIT ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लिया है। व्यापारियों का कहना है कि रामलीला मैदान समेत अन्य जगहों पर हो रहे राजनीतिक आयोजनों के कारण बाजारों में ग्राहकों का पहुंचना मुश्किल हो गया है। दिवाली और शादी-विवाह का सीजन रिटेल सेक्टर के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, लेकिन प्रदर्शनों के चलते दुकानों पर सन्नाटा पसरा है।
संविधान और व्यापार का अधिकार
CAIT ने इस मुद्दे को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) से जोड़ा है, जो हर नागरिक को व्यापार करने की स्वतंत्रता देता है। व्यापारियों का तर्क है कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन इसके कारण आम आदमी की रोजी-रोटी और व्यापारिक गतिविधियों को बाधित करना अनुचित है।
आर्थिक नुकसान का आंकड़ा
Chamber of Trade and Industry (CTI) के अनुमान के मुताबिक, हालिया प्रदर्शनों और बाजार बंदी के कारण दिल्ली के व्यापारियों को लगभग ₹11,000 करोड़ से ₹14,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। व्यापारियों के लिए यह भरपाई करना बेहद मुश्किल है क्योंकि फेस्टिव सीजन का समय काफी सीमित होता है।
आगे की रणनीति: 'धिक्कार दिवस'
व्यापारी अब इस बात पर जवाब मांग रहे हैं कि नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या राजनीतिक दल छोटे दुकानदारों के घाटे की जिम्मेदारी लेंगे? दिवाली के बाद CAIT ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है, जिसमें देशभर के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस बैठक में 'धिक्कार दिवस' (Dhikkar Diwas) के आयोजन की रूपरेखा तय की जाएगी, ताकि राजनीतिक एजेंडे में रिटेल सेक्टर को बलि का बकरा बनाने के खिलाफ आवाज उठाई जा सके।
