नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने Byju's की पेरेंट कंपनी Think & Learn के लिए खरीदारों की तलाश पर अस्थायी रोक लगा दी है। वहीं, BCCI के साथ ₹158 करोड़ के सेटलमेंट का मामला भी अटका हुआ है, क्योंकि क्रेडिटर (लेनदार) फंडिंग के सोर्स पर और स्पष्टता चाहते हैं। इस कानूनी अड़चन की वजह से अगली सुनवाई सितंबर तक टल गई है।
Detailed Coverage
Byju's के रिजॉल्यूशन प्रोसेस में आई नई रुकावट
एजुकेशन टेक कंपनी Byju's के रिजॉल्यूशन प्रोसेस में एक नया मोड़ आ गया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने पेरेंट कंपनी Think & Learn के लिए संभावित खरीदारों की तलाश को टाल दिया है। ट्रिब्यूनल ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को 31 अगस्त तक किसी भी औपचारिक बोली को आमंत्रित करने या आवेदकों की सूची को अंतिम रूप देने से रोक दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब कंपनी जटिल इंसॉल्वेन्सी प्रोसीडिंग्स (दिवालियापन की कार्यवाही) और एक हाई-स्टेक्स फाइनेंशियल सेटलमेंट से जूझ रही है।
BCCI सेटलमेंट का क्या है स्टेटस?
सबसे बड़ा अड़चन BCCI के साथ प्रस्तावित ₹158 करोड़ के सेटलमेंट को लेकर है। यह सेटलमेंट एक एस्क्रो अकाउंट में रखे गए फंड से जुड़ा है और इसका मकसद BCCI के कंपनी के खिलाफ दावों का निपटारा करना है। हालांकि, क्रेडिटर कमेटी (लेनदारों की समिति) ने अभी तक इस डील को हरी झंडी नहीं दी है। हाल की सुनवाई में, लेनदारों ने सेटलमेंट फंड के सोर्स और बैंक गारंटी की स्थिति पर अतिरिक्त दस्तावेज मांगे हैं।
अगर सेटलमेंट को मंजूरी मिल जाती है, तो इंसॉल्वेन्सी प्रोसेस को खत्म किया जा सकता है। अगर यह रिजेक्ट होता है, तो Riju Ravindran द्वारा प्रदान किए गए फंड वापस कर दिए जाएंगे और इंसॉल्वेन्सी प्रोसीडिंग्स जारी रहेंगी। NCLT ने आदेश दिया है कि इन फंड्स को ब्याज देने वाले फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाए, और किसी भी भविष्य के ट्रांजेक्शन के लिए ट्रिब्यूनल की विशेष मंजूरी की आवश्यकता होगी।
फाउंडर्स की कानूनी चुनौतियां और लेनदारों के विवाद
BCCI सेटलमेंट के अलावा, Byju's के फाउंडर्स ने GLAS Trust के अधिकार को चुनौती देते हुए कानूनी लड़ाई शुरू की है, जो अमेरिकी लेनदारों के एक समूह का प्रतिनिधित्व करता है। फाउंडर्स ने इन लेनदारों के दावों की राशि पर सवाल उठाया है और तर्क दिया है कि विदेशी संपत्तियों से होने वाली रिकवरी को कुल देनदारी में शामिल किया जाना चाहिए।
इस विवाद ने रिजॉल्यूशन प्रोसेस को और जटिल बना दिया है। NCLT द्वारा खरीदार की तलाश पर अस्थायी रोक से फाउंडर्स को कुछ राहत मिली है, लेकिन Think & Learn के खिलाफ इंसॉल्वेन्सी का बड़ा मामला अभी भी जारी है। ट्रिब्यूनल Aakash Educational Services (जो अक्सर कंपनी की रीस्ट्रक्चरिंग एफर्ट्स में एक अहम संपत्ति मानी जाती है) से जुड़े संभावित अरेंजमेंट्स पर चल रही बातचीत पर भी नजर रख रहा है।
आगे क्या होगा?
इस मामले की कानूनी जटिलताएं कंपनी के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण अनिश्चितता को दर्शाती हैं। अगली NCLT सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है, जिसके बाद स्टेकहोल्डर्स क्रेडिटर कमेटी के सेटलमेंट पर अंतिम रुख का इंतजार करेंगे। निवेशक और विश्लेषक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या लेनदारों द्वारा मांगे गए दस्तावेज प्रदान किए जाते हैं और क्या अदालत लेनदार के दावों के संबंध में फाउंडर्स द्वारा उठाई गई चुनौतियों का समाधान करती है। अंतिम समाधान इस बात पर निर्भर करेगा कि आगामी सत्रों के दौरान ट्रिब्यूनल BCCI, अंतरराष्ट्रीय लेनदारों और कंपनी प्रबंधन के हितों में कैसे संतुलन बनाता है।
