सरकारी फैसले का असर
केंद्र सरकार ने मलेशिया से इंपोर्ट होने वाले सोलर ग्लास पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी (Countervailing Duties) को अगले 5 साल यानी 2031 तक बढ़ा दिया है। यह फैसला भारतीय सोलर सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पहले यह ड्यूटी इसी महीने खत्म होने वाली थी, लेकिन अब इसे 9.71% से लेकर 10.14% तक बढ़ाया गया है। सरकार का यह कदम Xinyi Solar और SBH Kibing Solar जैसी मलेशियन कंपनियों को फायदा उठाने से रोकेगा और भारतीय कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहे दबाव को कम करेगा।
बाज़ार में आई रौनक
इस खबर के आते ही Borosil Renewables के शेयर में 7% से ज़्यादा की तेज़ी आ गई। यह तब हुआ जब Sensex जैसे बड़े इंडेक्स पर बिकवाली का दबाव था। इससे यह साफ है कि निवेशक इस सरकारी सुरक्षा को कंपनी की विस्तार योजनाओं के लिए बहुत अहम मान रहे हैं। पिछले 12 महीनों में शेयर में 11% की गिरावट के बावजूद, पिछले 3 महीनों में स्टॉक 20% से ज़्यादा चढ़ चुका है। यह दिखाता है कि इंपोर्ट कंपटीशन कम होने का फायदा अब निवेशक स्टॉक में देख रहे हैं।
चिंताएं और रिस्क
हालांकि, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से फौरी राहत ज़रूर मिली है, लेकिन कंपनी की लॉन्ग-टर्म एफिशिएंसी पर सवाल बने हुए हैं। Borosil Renewables का वैल्यूएशन काफी हाई है, और इसका P/E रेश्यो 300x से भी ऊपर जा चुका है। ऐसे में वैल्यू इन्वेस्टर्स चिंतित हैं। कंपनी को हाई वर्किंग कैपिटल की ज़रूरत पड़ती है और यह गैस पर निर्भर है, जिससे जियो-पॉलिटिकल रिस्क बना रहता है। सोलर ग्लास पर ज़्यादा फोकस होने के कारण, यह कंपनी सोलर पैनल टेंडर्स के उतार-चढ़ाव का शिकार हो सकती है, जहां बड़ी कंपनियां अक्सर आक्रामक तरीके से बिडिंग करती हैं।
आगे की रणनीति
कंपनी मैनेजमेंट अपनी गुजरात वाली यूनिट में 600 टन प्रति दिन की प्रोडक्शन कैपेसिटी 2026 के अंत तक बढ़ाने पर फोकस कर रही है। इस विस्तार और नई ट्रेड प्रोटेक्शन के साथ, कंपनी का लक्ष्य लोकल डिमांड को पूरा करना है। लेकिन, यह देखना होगा कि क्या कंपनी इन ड्यूटीज का फायदा उठाकर अपने मार्जिन को सुधार पाती है, या फिर मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट इंपोर्टेड माल से ज़्यादा ही रहती है।
