बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए Bombay High Court ने सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगा दी है। वहीं दूसरी ओर, लुधियाना में जमीन की कमी के कारण टेक्सटाइल यूनिट्स के लिए Effluent Treatment Plant का काम रुक गया है, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती है।
सार्वजनिक जगहों पर पटाखे फोड़ने पर पाबंदी
प्रदूषण और शोर को नियंत्रित करने के लिए Bombay High Court ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों और रास्तों पर पटाखे फोड़ने पर सख्त रोक लगा दी है। कोर्ट ने म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, पुलिस और Maharashtra Pollution Control Board (MPCB) को इस आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। अब इन इलाकों में डेसिबल मीटर के जरिए निगरानी रखी जाएगी और शिकायत के लिए नए मैकेनिज्म तैयार किए जाएंगे।
यह फैसला बिजनेस वर्ल्ड के लिए एक संकेत है कि शहरी क्षेत्रों में अब एनवायर्नमेंटल रेगुलेशन (Environmental Regulation) बहुत सख्त हो रहे हैं। त्यौहारों के सीजन या पब्लिक इवेंट्स से जुड़ी कंपनियों को अब अनुपालन (Compliance) के मोर्चे पर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
लुधियाना टेक्सटाइल सेक्टर की मुश्किलें
दूसरी तरफ, पंजाब के लुधियाना में स्थित Industrial Area-A के टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। यहाँ की फैक्ट्रियों के लिए प्रस्तावित 'कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट' का काम जमीन न मिल पाने के कारण ठप पड़ा है। हालांकि क्षेत्र में अन्य ट्रीटमेंट प्लांट्स काम कर रहे हैं, लेकिन इन यूनिट्स को उनसे जोड़ने में तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियां आ रही हैं।
यह मामला भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बुनियादी समस्या को दर्शाता है। जब तक साझा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं होता, तब तक व्यक्तिगत फैक्ट्रियों के लिए सरकारी डिस्चार्ज मानकों (Discharge Standards) को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। अगर यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हुआ, तो फैक्ट्रियों पर रेगुलेटरी फाइन लगने या ऑपरेशन बंद होने का खतरा बना रहेगा। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि पंजाब सरकार जमीन और कनेक्टिविटी की इस समस्या को कब तक सुलझा पाती है।
