Bombay High Court ने महाराष्ट्र की सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर सालभर के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इस आदेश को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट का सख्त फरमान
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने यह फैसला पर्यावरण की गंभीर स्थिति को देखते हुए लिया है। मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे शहरों में गिरती एयर क्वालिटी को रोकने के लिए अब यह प्रतिबंध केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक स्थाई नियम बना दिया गया है।
कैसे होगा पालन?
कोर्ट ने Maharashtra Pollution Control Board, स्थानीय नगर निकायों और पुलिस को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। नियमों को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को डेसिबल मीटर (decibel meters) का उपयोग करने और नोडल ऑफिसर (nodal officers) नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। अगले 7 दिनों के भीतर जन-जागरूकता अभियान चलाने के लिए भी कहा गया है। अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी, जिसमें अनुपालन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
निवेशकों के लिए संकेत
यह कदम भारत में बढ़ते ESG (Environmental, Social, and Governance) नियमों की ओर इशारा करता है। हालांकि फटाका उद्योग मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में है, लेकिन रासायनिक आपूर्ति श्रृंखला (chemical supply chain) और पैकेजिंग से जुड़ी कंपनियों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। भविष्य में सख्त पर्यावरणीय नियमों के कारण कंप्लायंस कॉस्ट (compliance costs) बढ़ सकती है, जिससे कंज्यूमर गुड्स और केमिकल सेक्टर को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना पड़ सकता है।
