केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और बिहार सरकार ने एक बड़ा समझौता किया है। इस 'Nadi Sanjivani' पहल के जरिए नदी की गाद (Silt) का इस्तेमाल **43** नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा, जिसमें **1,000 लाख क्यूबिक मीटर** से ज्यादा गाद का उपयोग होगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और बिहार सरकार ने मिलकर 'Nadi Sanjivani' पहल की शुरुआत की है, जिसका मकसद नदी की गाद को हाईवे निर्माण के काम में लाना है। 3 नवंबर, 2026 को हुए इस समझौते के तहत अब कचरे को एक कीमती निर्माण सामग्री में बदला जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया 'बिहार जल संसाधन पुनर्स्थापन और गाद प्रबंधन नीति, 2026' के तहत संचालित होगी।
प्रोजेक्ट का दायरा और लक्ष्य
इस प्रोग्राम का स्केल काफी बड़ा है। सरकार ने पहले चरण में 16 जारी प्रोजेक्ट्स के लिए 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद आवंटित की है, जबकि भविष्य के 27 प्रोजेक्ट्स के लिए 835 लाख क्यूबिक मीटर गाद का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय नदियों से सामग्री मिलने के कारण मिट्टी और रेत के खनन पर निर्भरता कम होगी, जिससे लॉजिस्टिक्स का खर्च घटेगा और पर्यावरणीय मंजूरी में होने वाली देरी से भी राहत मिलेगी।
निर्माण कंपनियों के लिए मायने
निर्माण करने वाली कंपनियों के लिए यह एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। हाईवे प्रोजेक्ट्स में मिट्टी और भराव की सामग्री जुटाना काफी खर्चीला होता है, जिसे इस योजना से कम किया जा सकेगा। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इसमें कुछ तकनीकी चुनौतियां भी हैं।
गाद को सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता; उसे National Highways Authority of India (NHAI) के मानकों के मुताबिक तैयार करने के लिए स्क्रीनिंग, धुलाई और ब्लेंडिंग जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। अगर गाद की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं रही, तो प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है। इसके अलावा, नदी से गीली गाद को निकालने और सुखाने की प्रक्रिया निर्माण की गति पर असर डाल सकती है।
अंत में, यह देखना अहम होगा कि सरकार बिना किसी अतिरिक्त लागत के इस सामग्री को कैसे उपलब्ध कराती है और ठेकेदार इसे सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना अपनी टाइमलाइन में कैसे फिट करते हैं।
