बिहार में आई भीषण बाढ़ से **15** जिलों में करीब **47 लाख** लोग बेहाल हैं। गंगा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और फसलों को भारी नुकसान की आशंका है।
बिहार में इस बार मानसून का मिजाज काफी सख्त रहा है, जहां सितंबर महीने में औसत से 20% ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इस भारी बारिश के कारण गंगा, गंडक और कोसी जैसी नदियां अपना रौद्र रूप दिखा रही हैं, जो खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं।
भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 2.12 मीटर ऊपर पहुंच चुका है। राज्य की 561 ग्राम पंचायतों में आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है। निवेशकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि इससे खरीफ फसलों के बर्बाद होने और सप्लाई चेन में बड़े व्यवधान की आशंका बढ़ गई है।
राहत और बचाव कार्य (Relief Operations)
हालात से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत कार्य शुरू किए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने 27 SDRF और 10 NDRF की टीमों को तैनात किया है। विस्थापित परिवारों की मदद के लिए 1,190 से ज्यादा कम्युनिटी किचन चलाए जा रहे हैं और करीब 2,000 नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
आने वाला समय और चुनौतियां
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे पटना, भोजपुर और कटिहार जैसे प्रभावित जिलों में पानी उतरने की रफ्तार धीमी हो सकती है। नेपाल से छोड़े जा रहे पानी के कारण तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सरकार कितनी तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर को बहाल करती है और इस आपदा से इकोनॉमी को कितना नुकसान पहुंचता है।
