बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गंगा सहित कई नदियां **13** जिलों में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे फसलों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।
बिहार में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। गंगा के अलावा सोन, पुनपुन, कोसी और गंडक जैसी प्रमुख नदियां भी उफान पर हैं। राज्य के 13 जिले इसकी चपेट में हैं, जिनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद सबसे अधिक प्रभावित हैं। पटना के गांधी घाट पर जलस्तर 50.25 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान से काफी ऊपर है।
आर्थिक और कृषि पर मार
इस आपदा का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। दियारा इलाकों में मक्का और सब्जियों की फसलों के डूबने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है, जो आने वाले हफ्तों में सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।
बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स में बाधा
बाढ़ के कारण सड़कों का नेटवर्क भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसमें नेशनल हाईवे 319A के कुछ हिस्से शामिल हैं। कई ग्रामीण इलाकों में बिजली की आपूर्ति ठप हो गई है, जिससे जरूरी सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो गई है।
बचाव अभियान और राहत कार्य
राज्य सरकार ने NDRF और SDRF की टीमों को तैनात कर दिया है। राहत शिविरों में भोजन, मेडिकल किट और साफ पानी पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। इंद्रपुरी बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। अब आगे गांधी घाट और हाथीदह जैसे केंद्रों पर पानी घटने की रफ्तार और नुकसान के आकलन पर प्रशासन की नजरें टिकी हैं।
