बिहार उपचुनाव: बैंकपुर में वोटिंग शुरू, जन सुराज का बीजेपी को कड़ा मुकाबला

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
बिहार उपचुनाव: बैंकपुर में वोटिंग शुरू, जन सुराज का बीजेपी को कड़ा मुकाबला

बिहार की बैंकपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए वोटिंग जारी है। यहाँ **26** उम्मीदवार मैदान में हैं, और यह सीट **1995** से बीजेपी के कब्जे में है। यह मुकाबला राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के लिए बीजेपी के लंबे समय से चले आ रहे प्रभुत्व को चुनौती देने का एक अहम इम्तिहान है।

बैंकपुर में चुनावी रण: वोटिंग जारी

बिहार की बैंकपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह वोटिंग शुरू हो गई है। शुरुआती दो घंटों में 4.61% मतदान दर्ज किया गया है। इस चुनाव को एक महत्वपूर्ण चुनावी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नवगठित जन सुराज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को उस सीट से हटाने की कोशिश कर रही है जिस पर वह 1995 से काबिज है।

चुनावी इतिहास और स्थानीय समीकरण

बैंकपुर सीट, जिसे पहले पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था, लगभग तीन दशकों से बीजेपी का मजबूत किला रही है। सीट खाली होने का कारण पिछले विधायक नितिन नवीन का अप्रैल 2026 में राज्यसभा के लिए चुना जाना था। नवंबर 2025 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में, नवीन ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की रेणु गुप्ता को 50,000 से अधिक वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। रेणु गुप्ता इस उपचुनाव में भी मैदान में हैं, जिससे 26 उम्मीदवारों के बीच एक बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।

आरोपों और राजनीतिक तनाव का माहौल

वोटिंग प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक गहमागहमी भी तेज है। प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि बिहार पुलिस ने उनके कई समर्थकों को हिरासत में लिया है, और दावा किया है कि यह कार्रवाई सत्तारूढ़ दल द्वारा मतदाता मतदान को दबाने के लिए राजनीतिक रूप से प्रेरित थी। इन आरोपों ने मतदान के दिन को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है, क्योंकि दोनों पार्टियां अपने-अपने समर्थकों को लामबंद करने में जुटी हैं।

मतदाता जुड़ाव और राज्य की राजनीति

वरिष्ठ बीजेपी नेता सी.पी. ठाकुर, नवादा सांसद विवेक ठाकुर और राज्य मंत्री रामकृपाल यादव सहित कई प्रमुख हस्तियां शुरुआती मतदाताओं में शामिल थीं। राज्य बीजेपी अध्यक्ष संजय सराओगी सहित पार्टी नेतृत्व ने इस चुनाव को स्थानीय विकास पर एक जनमत संग्रह के रूप में पेश किया है। भले ही इस उपचुनाव के राजनीतिक परिणाम स्थानीय प्रकृति के हों, लेकिन इनके संभावित प्रभाव पर नजर रखी जा रही है जो बिहार की व्यापक राजनीतिक कथा और नई क्षेत्रीय राजनीतिक संस्थाओं के प्रभाव को दर्शा सकते हैं। निवेशक और विश्लेषक अंतिम मतदान आंकड़ों और नतीजों का इंतजार करेंगे ताकि राज्य के भीतर स्थिरता और बदलते राजनीतिक समीकरणों का अंदाजा लगाया जा सके, जो इस क्षेत्र के व्यापक आर्थिक और नियामक वातावरण के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.