ONDC, GeM पर पहुंचीं GI प्रोडक्ट्स, सरकार ने लॉन्च की 'भारत GI' पहल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ONDC, GeM पर पहुंचीं GI प्रोडक्ट्स, सरकार ने लॉन्च की 'भारत GI' पहल

सरकार ने **5 अगस्त, 2026** को 'भारत GI' पहल की शुरुआत की है। इसका मकसद है रजिस्टर्ड GI प्रोडक्ट्स को सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ONDC और GeM पर लाना। इस कदम से स्थानीय कारीगरों को बड़ा बाज़ार मिलेगा और उनके उत्पादों की डिजिटल पहचान मजबूत होगी।

डिजिटल बाज़ार में पारंपरिक कारीगरी

भारतीय सरकार ने ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) रजिस्टर्ड प्रोडक्ट्स के लिए बाज़ार तक पहुंच को आधुनिक बनाने हेतु 'भारत GI' पहल की शुरुआत की है। 5 अगस्त, 2026 को माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) मंत्रालय और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के बीच हुए इस समझौते के तहत, पारंपरिक उत्पादों को डिजिटाइज़ करने पर ज़ोर दिया जाएगा।

ONDC और GeM से जुड़ेंगे पारंपरिक उत्पाद

'भारत GI' प्रोजेक्ट का मुख्य काम GI कलेक्टिव्स और अधिकृत उत्पादकों को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) जैसे सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाना है। सरकार का लक्ष्य है कि इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके, जो कारीगर छोटे समूहों में काम करते हैं, उन्हें एक बड़ा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ग्राहक वर्ग मिले।

यह पहल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कारीगर और MSME सेक्टर को औपचारिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन अनोखे उत्पादों को डिजिटल दुनिया में लाने से, सरकार को गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाने और उन उत्पादों की व्यावसायिक व्यवहार्यता बढ़ाने की उम्मीद है जो पहले सिर्फ स्थानीय बाज़ारों तक सीमित थे। इस रणनीति में 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) प्रोग्राम को भी शामिल किया गया है।

ऑपरेशनल चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

डिजिटल पहलों के बावजूद, 'भारत GI' की सफलता उसके जमीनी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। ONDC और GeM केवल बाज़ार और सुविधा प्रदाता के तौर पर काम करते हैं; ये पब्लिकली ट्रेडेड कंपनियां नहीं हैं, इसलिए इस खबर का सीधे तौर पर किसी लिस्टेड स्टॉक पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, यह पहल आर्थिक विकास के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के लगातार फोकस को दर्शाती है।

इस प्रोजेक्ट को लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न और भौगोलिक रूप से बिखरे हुए कारीगर समूहों का लॉजिस्टिक्स और डिजिटल ऑनबोर्डिंग होगी। हजारों तरह की चीज़ों, जिनमें हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थ से लेकर निर्मित माल तक शामिल हैं, के लिए राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मानक गुणवत्ता सुनिश्चित करना एक जटिल प्रक्रिया होगी। लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और MSME सपोर्ट से जुड़े निवेशक और हितधारक इस डिजिटल ऑनबोर्डिंग की गति पर नज़र रख सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.