बेंगलुरु स्थित स्पेस स्टार्टअप EtherealX ने अपने नए 'Full-flow Segregated Cooling Cycle' इंजन का खुलासा किया है, जिसका मकसद रॉकेट लॉन्च की लागत को कम करना है। हालांकि यह एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि है, लेकिन निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि यह एक प्राइवेट और प्री-रेवेन्यू कंपनी है, जो पूरी तरह से टेस्टिंग और बाहरी फंडिंग पर निर्भर है।
बेंगलुरु के स्पेस स्टार्टअप EtherealX Exploration Guild ने अपनी नई 'Full-flow Segregated Cooling Cycle' (FSCC) इंजन तकनीक को पेश किया है। इसे खास तौर पर कंपनी के आगामी मीडियम-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल 'Razor Crest Mk-1' के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि भारत में स्पेस ट्रांसपोर्टेशन की महंगी लागत को कम किया जा सके।
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
कंपनी ने एक ऐसा डिजाइन तैयार किया है जहां फ्यूल सिस्टम को थर्मल मैनेजमेंट से जोड़ा गया है। रॉकेट जब वायुमंडल में वापस प्रवेश करता है, तो यह इंजन अपने पुर्जों के जरिए प्रोपेलेंट को घुमाता है, जिससे तेज गर्मी सोख ली जाती है। यह तकनीक रॉकेट को बिना भारी हीट शील्ड के सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है, जिससे उसका वजन कम हो जाता है।
निवेश का जोखिम (Investment Risk)
यह समझना जरूरी है कि EtherealX एक प्राइवेट और अनलिस्टेड कंपनी है। इसके शेयर NSE या BSE जैसे एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते हैं। अभी कंपनी को कोई राजस्व (Revenue) नहीं मिल रहा है, और इसका सारा कामकाज वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी फंड्स पर टिका है। कंपनी ने अब तक लगभग $26.3 मिलियन जुटाए हैं, जिसमें $20.5 मिलियन की सीरीज ए फंडिंग शामिल है। कंपनी ने $130 मिलियन के संभावित लॉन्च सर्विस के लिए MoU साइन किए हैं, लेकिन ये नॉन-बाइंडिंग हैं और इनकी गारंटी तब तक नहीं है जब तक रॉकेट उड़ान के लिए तैयार न हो जाए।
कड़ा मुकाबला और अगली चुनौती
EtherealX का मुकाबला SpaceX जैसे दिग्गजों और भारत के Skyroot Aerospace व Agnikul Cosmos जैसे स्टार्टअप्स से है। कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती नवंबर में होने वाला 'हॉट-फायर टेस्ट' है। अगर टेस्टिंग में कोई बाधा आती है, तो इसकी 2027 की डेमोंस्ट्रेटर फ्लाइट और 2028 के कमर्शियल लॉन्च के टारगेट में देरी हो सकती है। फिलहाल, निवेशकों की नजरें कंपनी के आगामी ग्राउंड टेस्टिंग फेज पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक थ्योरी है या हकीकत में बदल पाएगा।
