बेंगलुरु के 16.75-किमी टनल रोड प्रोजेक्ट के लिए Adani Enterprises सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। कंपनी की **₹22,267 करोड़** की बोली सरकारी अनुमान **₹17,698 करोड़** से काफी ज्यादा है, जिसने अब कई आर्थिक और प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रोजेक्ट की वित्तीय चुनौतियां
बेंगलुरु के हेब्बल से सिल्क बोर्ड तक बनने वाले 16.75-किमी टनल रोड प्रोजेक्ट पर वित्तीय संकट के बादल मंडराने लगे हैं। Adani Enterprises ने इस प्रोजेक्ट के लिए ₹22,267 करोड़ की बोली लगाकर बाजी तो मार ली है, लेकिन यह आंकड़ा सरकार के शुरुआती अनुमान ₹17,698 करोड़ से काफी अधिक है। इस बड़े अंतर को पाटना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
डी.के. शिवकुमार की अपील और इंफ्रास्ट्रक्चर का विजन
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार ने बिजनेस कम्युनिटी से इस प्रोजेक्ट का समर्थन करने की अपील की है। उनका तर्क है कि शहर की पुरानी सड़कों पर ट्रैफिक का बोझ असहनीय हो गया है और यह टनल ₹1.5 लाख करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंडे का अहम हिस्सा है, जो राज्य की औद्योगिक स्थिति को और मजबूत करेगा।
विवादों और पर्यावरण की चिंताएं
वित्तीय दिक्कतों के अलावा, यह प्रोजेक्ट कानूनी और पर्यावरणीय विवादों में भी फंसा है। मुख्य चिंता लालबाग बॉटनिकल गार्डन जैसे धरोहर स्थलों पर इसके प्रभाव को लेकर है। हाल ही में आए 'कर्नाटक गवर्नमेंट पार्क्स (प्रिजर्वेशन) (अमेंडमेंट) बिल, 2026' के जरिए संरक्षित भूमि का 5% इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है, जिसका नागरिक समूह जमकर विरोध कर रहे हैं।
आगे की राह
यह प्रोजेक्ट BOOT (बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल पर आधारित है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 40% 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF) दी जाएगी। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कैबिनेट इस बड़ी बोली को मंजूरी देगी, या फिर प्रोजेक्ट को री-टेंडर किया जाएगा। किसी भी तरह की कानूनी अड़चन या प्रोजेक्ट में देरी निवेशकों के लिए एक बड़ा 'रिस्क फैक्टर' बनी रहेगी।
