Bengaluru Food Crackdown: **1,089 Kg** असुरक्षित भोजन जब्त, टॉप होटलों में हड़कंप!

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Bengaluru Food Crackdown: **1,089 Kg** असुरक्षित भोजन जब्त, टॉप होटलों में हड़कंप!

कर्नाटक की खाद्य सुरक्षा टीम ने बेंगलुरु के **60** लग्जरी होटलों में तीन दिनों तक चले अभियान के दौरान **1,089 किलोग्राम** से ज़्यादा असुरक्षित भोजन जब्त किया है। इस कार्रवाई में कई प्रीमियम किचन को बंद भी करना पड़ा, जो हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में बढ़ती जांच का संकेत है।

खाद्य सुरक्षा की बड़ी कार्रवाई

कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने बेंगलुरु के 3-स्टार और 5-स्टार होटलों में खाने की क्वालिटी और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए 3 दिन का एक बड़ा अभियान चलाया। स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर के निर्देश पर हुई इस मुहिम में 1,089 किलोग्राम खाने-पीने की चीज़ों को जब्त कर नष्ट कर दिया गया। जांच के दौरान एक्सपायर्ड सामान, गलत लेबलिंग और साफ-सफाई की कमी जैसी कई खामियां पाई गईं।

कई किचन पर गिरी गाज

30 स्पेशल यूनिट्स की टीमों ने खास तौर पर फूड स्टोरेज और हाइजीन पर ध्यान केंद्रित किया। कई बड़े होटलों में गंभीर खामियों के चलते उनके किचन को तुरंत बंद कर दिया गया। UB City के Skyye Lounge और Hotel Sky जैसे होटलों के किचन में फंगस लगा मांस और एक्सपायर्ड डेयरी प्रोडक्ट्स मिलने पर उन्हें सील कर दिया गया। Pegs & Bottles जैसे प्रतिष्ठानों पर भी ऐसी ही कार्रवाई हुई। इसके अलावा, कई अन्य होटलों को नोटिस जारी किए गए हैं और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

बड़े फूड चेन्स पर भी नजर

सिर्फ प्रीमियम होटल ही नहीं, बल्कि KFC, McDonald's और Subway जैसे बड़े इंटरनेशनल फूड चेन्स के आउटलेट्स पर भी यह ड्राइव चलाई गई। इन जगहों से 77 सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें लैब में जांच के लिए भेजा गया है। जांच के नतीजे आने के बाद आगे की कार्रवाई फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत की जाएगी। यह कार्रवाई दिखाती है कि राज्य सरकारें कंज्यूमर सेफ्टी को लेकर हॉस्पिटैलिटी और फूड सर्विस सेक्टर पर अपनी निगरानी बढ़ा रही हैं।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

हॉस्पिटैलिटी और रेस्टोरेंट सेक्टर में निवेश करने वाले लोगों के लिए फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन एक बड़ा रिस्क है। प्रीमियम डाइनिंग में ब्रांड की वैल्यू सीधे तौर पर भरोसे और क्वालिटी से जुड़ी होती है। हाइजीन की कमी या रेगुलेटरी एक्शन से ब्रांड की इमेज को तुरंत नुकसान पहुंच सकता है, जिसका असर बिक्री पर पड़ सकता है। इसके अलावा, बढ़ती रेगुलेटरी सख्ती से कंप्लायंस कॉस्ट (अनुपालन लागत) भी बढ़ सकती है, क्योंकि कंपनियों को क्वालिटी कंट्रोल, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और सुविधाओं को बेहतर बनाने में ज़्यादा पैसा लगाना पड़ सकता है। निवेशकों को लैब टेस्ट के नतीजों पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि किसी भी तरह की पुष्टि होने पर प्रभावित आउटलेट्स पर और ज़्यादा पेनल्टी या कार्रवाई हो सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.