बांग्लादेश में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर छिड़े विरोध प्रदर्शन के चलते करीब **670** गारमेंट फैक्ट्रियों ने काम रोक दिया है। इस हलचल से ग्लोबल सप्लाई चेन पर संकट मंडरा रहा है, जिससे बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स अब भारत जैसे अन्य मैन्युफैक्चरिंग हब की ओर रुख कर सकते हैं।
बांग्लादेश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इस वक्त भारी तनाव है। 3 नवंबर, 2026 तक करीब 670 गारमेंट फैक्ट्रियों में कामकाज पूरी तरह ठप हो चुका है। ढाका, गाजीपुर, अशुलिया और मेमनसिंह जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं। उनकी मुख्य मांग न्यूनतम मासिक वेतन को 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका करने की है। वर्कर्स का कहना है कि बढ़ती महंगाई और महंगे जीवन यापन के कारण पुरानी सैलरी में गुजारा मुमकिन नहीं है।\n\nहालात को काबू करने के लिए सरकार ने 1 नवंबर, 2026 को 6 सदस्यीय 'मिनिमम वेज बोर्ड' का गठन किया है, लेकिन प्रदर्शन अब भी जारी हैं। हिंसा और तोड़फोड़ की खबरों के बाद वहां के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।\n\n### ग्लोबल सप्लाई चेन पर क्या होगा असर?\n\nबांग्लादेश का गारमेंट सेक्टर वहां के कुल एक्सपोर्ट का 80% से ज्यादा हिस्सा संभालता है। H&M, Zara, Gap और Primark जैसे बड़े ब्रांड्स का बड़ा प्रोडक्शन यहीं होता है। पीक सीजन में काम रुकने से स्प्रिंग और समर इन्वेंट्री की डिलीवरी में भारी देरी हो सकती है, जिससे ये कंपनियां अपना प्रोडक्शन शिफ्ट करने पर मजबूर हो सकती हैं।\n\n### भारत के लिए मौका?
\nग्लोबल रिटेलर्स अब 'प्लस-वन' स्ट्रैटेजी अपना रहे हैं, जिसका सीधा फायदा भारत, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों को मिल सकता है। हालांकि, भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के लिए यह एक अवसर है, लेकिन यह पूरी तरह से देश की क्षमता और कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस पर निर्भर करेगा। फिलहाल, मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के ऑर्डर फ्लो को स्थायी रूप से बदल देगी।
