पिछले हफ्ते भारत की टॉप 10 कंपनियों में Bajaj Finance ने सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की। कंपनी के मार्केट वैल्यू में **₹80,000 करोड़** का इजाफा हुआ। यह उछाल जून तिमाही (FY27) में कंपनी के **28%** सालाना मुनाफे में बढ़ोतरी के नतीजों के बाद आया है।
नतीजों का असर: Bajaj Finance के शेयरों में तूफानी तेज़ी!
पिछले कारोबारी हफ्ते में भारतीय शेयर बाज़ार में शानदार रिकवरी देखने को मिली, जिसमें BSE Sensex 2.67% और NSE Nifty 2.59% चढ़े। इस तेजी ने टॉप 10 सबसे मूल्यवान भारतीय कंपनियों की संयुक्त मार्केट कैप में ₹2.51 लाख करोड़ का इजाफा किया। इस दौड़ में Bajaj Finance सबसे आगे रहा, जिसकी मार्केट वैल्यू ₹80,000 करोड़ से अधिक बढ़ गई।
मुनाफे ने दिलाई 8% की बढ़त
Bajaj Finance के शेयर में शुक्रवार को 8% की भारी तेज़ी इसी तिमाही के नतीजों का नतीजा थी। कंपनी ने FY27 की पहली तिमाही में अपने कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में पिछले साल की तुलना में 28% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है। निवेशकों के लिए यह ग्रोथ इस बात का संकेत है कि कंपनी का मुख्य लेंडिंग बिजनेस, आर्थिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, लगातार अच्छा मुनाफा कमा रहा है।
मार्केट का ओवरव्यू: कौन रहा टॉप पर?
Bajaj Finance की अगुवाई में, अन्य बड़ी कंपनियों जैसे Bharti Airtel ने भी करीब ₹44,960 करोड़, Tata Consultancy Services ने ₹40,414 करोड़ और Reliance Industries ने ₹39,448 करोड़ का मार्केट कैप हासिल किया। इनके अलावा Larsen & Toubro, State Bank of India, HDFC Bank, Life Insurance Corporation of India और ICICI Bank ने भी मार्केट कैप में अहम योगदान दिया।
यह ध्यान देने वाली बात है कि यह तेज़ी सभी कंपनियों के लिए एक जैसी नहीं रही। टॉप 10 में से Hindustan Unilever अकेली कंपनी रही जिसका मार्केट कैप करीब ₹10,326 करोड़ घट गया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी में आई तेज़ी ने बाज़ार की सेंटिमेंट को और मजबूत किया।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आगे चलकर, निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या कंपनियां आने वाली तिमाहियों में भी मुनाफे की यह ग्रोथ बनाए रख पाती हैं। Bajaj Finance के लिए, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM), एसेट क्वालिटी और बदलते इंटरेस्ट रेट माहौल में उधारी की लागत का प्रबंधन महत्वपूर्ण होगा। नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल सेक्टर में काम करने वाली कंपनी होने के नाते, इसका प्रदर्शन कंज्यूमर क्रेडिट की मांग और भारतीय अर्थव्यवस्था की समग्र सेहत पर निर्भर करेगा।
