Bajaj AMC CIO Nimish Chandan: विदेशी शेयरों से बेहतर भारत! जानें क्यों कहा "होम बायस" ही है सही

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AuthorAditya Rao|Published at:
Bajaj AMC CIO Nimish Chandan: विदेशी शेयरों से बेहतर भारत! जानें क्यों कहा "होम बायस" ही है सही

Bajaj Asset Management के CIO, निमिश चंदन, विदेशी इक्विटी से दूर, भारतीय संपत्तियों पर "होम बायस" की अपनी रणनीति पर कायम हैं। उन्होंने हाल ही में बाजार की अस्थिरता के दौरान घरेलू स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंडों में अपना निवेश बढ़ाया है। उनकी रणनीति लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स, करेंसी हेज के तौर पर सोने के इस्तेमाल और वैश्विक AI-संचालित शेयरों पर सतर्क नजरिए पर केंद्रित है।

Detailed Coverage

विदेशी निवेश से दूरी, भारत पर भरोसा

Bajaj Asset Management के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO), निमिश चंदन, ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिल्कुल भी निवेश न करने की अपनी रणनीति की पुष्टि की है। भले ही दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टॉक्स को लेकर जबरदस्त उत्साह हो, चंदन का मानना ​​है कि भारतीय इक्विटी और फिक्स्ड-इनकम बाजार में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद है। दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, वे उन व्यवसायों और संपत्तियों में निवेश करते हैं जिन्हें वे बेहतर ढंग से समझते हैं और जिनकी निगरानी करना आसान होता है।

बाजार की अस्थिरता में पोर्टफोलियो की रणनीति

पिछले दो वर्षों में बाजार में देखी गई अस्थिरता के बावजूद, चंदन ने इक्विटी में आवंटन कम करने के बजाय इसे बढ़ाने का एक विपरीत रुख अपनाया है। उनके पोर्टफोलियो में मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट का भारी दबदबा है, जो उनके कुल इक्विटी होल्डिंग्स का 60% हिस्सा हैं, जबकि लार्ज-कैप फंड 40% हैं। इनमें से अधिकांश निवेश एक्टिवली मैनेज्ड म्यूचुअल फंड्स के जरिए किए जाते हैं, जिससे उनके इक्विटी पोर्टफोलियो ने 17-19% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है।

करेंसी और फिक्स्ड इनकम का प्रबंधन

गिरते रुपये के मुकाबले हेजिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडों का उपयोग करने के बजाय, चंदन अपने पोर्टफोलियो में सोने को एक डिफेंसिव एसेट के रूप में इस्तेमाल करते हैं। उनका मानना ​​है कि सोने की प्राकृतिक मूल्य वृद्धि के कारण यह उनकी कुल संपत्ति के लिए एक "गोलकीपर" की तरह काम करता है। फिक्स्ड-इनकम की बात करें तो, वे पारंपरिक बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से पूरी तरह बचते हैं। इसके बजाय, वे अपने डेट पोर्टफोलियो का लगभग 90% बॉन्ड्स में रखते हैं, जिसमें टैक्स-फ्री बॉन्ड्स भी शामिल हैं, जिनसे उन्हें 11-11.5% का प्रभावी पोस्ट-टैक्स यील्ड मिला है। उनका मानना ​​है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा FCNR(B) डिपॉजिट और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स के प्रबंधन जैसे कदम सरकारी बॉन्ड यील्ड को स्थिर रखने में मदद करते हैं, जिससे वे आय-केंद्रित निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन जाते हैं।

भारतीय कमाई और जोखिमों पर दृष्टिकोण

चंदन भारत की अर्निंग्स (कमाई) की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। उनका कहना है कि मजबूत कॉर्पोरेट बैलेंस शीट और पूंजी पर कुशल रिटर्न (Returns on Capital) लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के प्रमुख चालक हैं। वे फाइनेंशियल, मैटेरियल्स, इंडस्ट्रियल्स, फार्मास्यूटिकल्स और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर्स में अपनी विशेष रुचि व्यक्त करते हैं। दूसरी ओर, वे चेतावनी देते हैं कि वैश्विक इक्विटी बाजार, खासकर AI-संचालित, ऊंचे वैल्यूएशन और अत्यधिक उम्मीदों के कारण करेक्शन का सामना कर सकते हैं। उनका अनुमान है कि विदेशी निवेशक अंततः भारतीय बाजार की ओर लौट सकते हैं, क्योंकि वे प्रमुख वैश्विक थीम्स से परे अधिक विविध निवेश के अवसरों की तलाश करेंगे। इस दृष्टिकोण का पालन करने वाले निवेशकों के लिए मुख्य निगरानी योग्य कारक घरेलू बाजार में अर्निंग्स ग्रोथ की स्थिरता और वैश्विक ब्याज दर के रुझान लार्ज-कैप बनाम मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों के प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करते हैं, यह होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.