BSE Index Services ने मार्केट में तीन नए ग्रोथ इंडेक्स लॉन्च किए हैं, जो हाई-ग्रोथ वाली कंपनियों पर फोकस करेंगे। हालांकि, ब्रोकरेज फर्मों की तरफ से मिली डाउनग्रेडिंग और रेगुलेटरी बदलावों के चलते BSE के शेयर में हाल में कुछ गिरावट देखने को मिली है।
नए इंडेक्स से पैसिव इन्वेस्टिंग को बढ़ावा
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की सब्सिडियरी, BSE Index Services ने तीन नए फैक्टर-बेस्ड इंडेक्स पेश किए हैं: BSE 500 Growth 50, BSE MidCap 150 Growth 30, और BSE LargeCap 100 Growth 30। इन इंडेक्स का मकसद एसेट मैनेजरों और निवेशकों को लगातार मुनाफा और सेल्स ग्रोथ दिखाने वाली कंपनियों पर नज़र रखने में मदद करना है। ये इंडेक्स रूल्स-बेस्ड सिलेक्शन प्रोसेस का इस्तेमाल करते हैं और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs), इंडेक्स फंड्स और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज जैसे नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के लिए बेंचमार्क का काम करेंगे।
फैक्टर इन्वेस्टिंग का बढ़ता चलन
ये नए इंडेक्स खास ग्रोथ क्राइटेरिया पर आधारित हैं, जिसमें अर्निंग्स पर शेयर (EPS) और सेल्स ग्रोथ जैसे मेट्रिक्स शामिल हैं। BSE 500 Growth 50 पूरे ब्रॉड मार्केट को कवर करता है, जबकि बाकी दो मिड-कैप और लार्ज-कैप सेगमेंट को टारगेट करते हैं। ये लॉन्च BSE की मौजूदा फैक्टर स्ट्रेटेजीज, जैसे मोमेंटम, क्वालिटी, लो वोलैटिलिटी और वैल्यू इंडेक्स, में और इजाफा करते हैं। यह कदम पैसिव इन्वेस्टिंग स्ट्रेटेजीज में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है, जो ग्रोथ-ओरिएंटेड पोर्टफोलियो तक पहुंचने का एक स्ट्रक्चर्ड तरीका प्रदान करते हैं।
स्टॉक पर क्यों मंडरा रहे खतरे?
जहां एक तरफ BSE अपने इंडेक्स सर्विस यूनिट के प्रोडक्ट्स को बढ़ा रहा है, वहीं पैरेंट कंपनी, BSE के शेयर में हाल में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। अगस्त 2026 में, कंपनी के शेयर की कीमत में महीने के बीच में लगभग 9.3% की गिरावट आई थी। मार्केट जानकारों का मानना है कि इस गिरावट का मुख्य कारण SEBI द्वारा अगस्त की शुरुआत में F&O-एलिजिबल स्टॉक्स के लिए लागू की गई नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को लेकर चिंताएं हैं।
Jefferies और Nuvama जैसी कई ब्रोकरेज फर्मों ने हाल ही में स्टॉक को डाउनग्रेड किया है। उनकी चिंताएं इस बात को लेकर हैं कि रेगुलेटरी बदलावों का डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग वॉल्यूम पर क्या असर पड़ेगा। डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग ऐतिहासिक रूप से एक्सचेंज के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया रहा है, और इसमें किसी भी तरह की कमी से फाइनेंशियल परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है। रेगुलेटरी बदलावों के अलावा, एक्सचेंज को ऊंचे सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और मार्केट शेयर के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए, नए इंडेक्स लॉन्च का लॉन्ग-टर्म फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि एसेट मैनेजर इन बेंचमार्क्स को कितनी जल्दी अपनाकर सफल, इन्वेस्टेबल प्रोडक्ट्स बनाते हैं। साथ ही, यह भी देखना होगा कि एक्सचेंज बदलते रेगुलेटरी माहौल में स्थिर ट्रेडिंग वॉल्यूम और रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रख पाता है या नहीं। आगे चलकर, यह देखना अहम होगा कि म्यूचुअल फंड्स इन नए इंडेक्स को कितना अपनाते हैं और नई ऑक्शन रूल्स लागू होने के बाद ट्रेडिंग टर्नओवर में क्या बदलाव आते हैं।
